बरवां जंगल में बनी ऐरोपोनिक यूनिट। संवाद
कुशीनगर/पकवा इनार। बरवा जंगल के आलू उत्कृष्टता केंद्र में एरोपोनिक यूनिट का ट्रायल पूरा हो गया है। यह सूबे में हापुड़ के बाद एरोपोनिक यूनिट का दूसरा केंद्र है। केंद्र का निर्माण अंतिम चरण में है। आलू उत्कृष्टता केंद्र में हवा में आलू के अनेक प्रजाति के पौधे तैयार किए जाएंगे। इसके लिए वैज्ञानिकों का चार दिवसीय प्रशिक्षण भी पूरा हो चुका है, ताकि इसके संचालन में किसी तरह का कोई बाधा न आए। पूर्वांचल के अलावा बिहार के किसानों के लिए भी यह वरदान होगा।
उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की ओर से बरवा जंगल आलू प्रक्षेत्र में निर्माणाधीन आलू उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर पोटैटो) में नवनिर्मित एरोपोनिक यूनिट का ट्रायल कृषि वैज्ञानिकों की मौजूदगी में पूरा हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ महीनों में केंद्र से आलू के उत्पादन को रफ्तार मिलेगी।
हालांकि अब भी केंद्र के कुछ कार्य अधूरे पड़े हैं लेकिन उन्हें शीघ्र पूरा करने के लिए विभागीय अधिकारी जुटे हुए हैं। प्रदेश के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने 28 अप्रैल 2022 को बरवां जंगल आलू प्रक्षेत्र में 8. 59 करोड़ की लागत से बनने वाले आलू उत्कृष्टता केंद्र के निर्माण के लिए नींव रखी थी। यह प्रदेश का दूसरा केंद्र है, पहला केंद्र हापुड़ में स्थित है। निर्माणाधीन आलू उत्कृष्टता केंद्र में वर्तमान में ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला, प्रशासनिक भवन, नेट हाउस, दो यूनिट एरोपोनिक, एक यूनिट हाईटेक, चीलर सिस्टम, आरओ प्लांट, दो कक्ष कोल्ड स्टोर बनकर तैयार हैं। कोल्ड स्टोर के प्रथम कक्ष में 15-16 डिग्री तापमान और दूसरे कक्ष में 2-5 डिग्री तापमान पर आलू रखा जाएगा।
सिंचाई के लिए बनाया जाएगा तालाब : फार्म में आलू उत्पादन के लिए ड्रिप सिंचाई विधि का उपयोग किया जाएगा। पूरे क्षेत्र में पाइप लाइन का काम किया जा चुका है। लेकिन इसमें सिंचाई के लिए पानी का प्रबंध नहीं हो पाया है। इसके लिए करीब डेढ़ लाख लीटर क्षमता के एक तालाब का निर्माण होना है। जगह चिह्नित कर लिया गया है, लेकिन उसके कार्य की कोई सुगबुगाहट नहीं है। तालाब के पास ही आपरेटिंग कक्ष भी बनाया जाना है।