पडरौना। शहर की हवा फरवरी के अंतिम सप्ताह में बिगड़ गई है। रात में नमी और दिन में तेज धूप के साथ सड़कों पर उड़ रहे धूल के गुबार से वातावरण में जहर घुल रहा है। इसके चलते एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) का लेवल 170 के पार पहुंच गया है।
ऐसे में सांस, गले में खराब और आंखों से संबंधित बीमारी से जूझ रहे बड़ी संख्या में मरीज मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों की ओपीडी में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डाॅक्टर दवा के साथ सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
फरवरी के दूसरे सप्ताह से ही मौसम में तेजी से बदलाव दिखने लगा। गर्मी बढ़ने के साथ वातावरण में नमी कम होने से मौसम शुष्क होने लगा है। इस दौरान चल रही तेज हवा और धूल उड़ रही है। रविवार की सुबह करीब दस बजे वायु गुणवत्ता 171 दर्ज की गई। यह गंभीर श्रेणी में माना जाता है। इसका सीधा असर लोगों के सेहत पर पड़ रहा है। सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या को लेकर मेडिकल कॉलेज में रोजाना 40 से 50 मरीज पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि धूल-धुएं के कारण प्रदूषक तत्वों में बढ़ोतरी होती है। ठंड के दिनों में प्रदूषण वाले कण वायुमंडल की निचली परत में रहते हैं। इससे सुबह व शाम को स्थिति और खराब रहती है। यह कण हमारे श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि बारिश हो जाए तो एक्यूआई नीचे आ जाएगा। फिलहाल शहर की एक्यूआई लेवल 171 पर पहुंच गया है। इससे हवा प्रदूषित हो गई है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। सांस, गले और आंख के मरीज बढ़ गए हैं। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभाग में सांस, अस्थमा, एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। हर रोज 100 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. रुचिका सिंह ने बताया कि वातावरण में हवा स्तर खराब होने से लोगों की सेहत पर असर पड़ता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम जाती है। इससे बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।
सामान्य लोगों को वायु प्रदूषण से एलर्जी की दिक्कत हो सकती है, जबकि आंख में भी परेशानी हो सकती है। आंख में जलन, लालीपन हो जाता है। नजर भी कमजोर हो सकती है। हवा में ऑक्सीजन लेवल कम होने से भी दिक्कत हो सकती है। हृदय रोगियों और क्रोनिक बीमारी से ग्रसित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। एक्यूआई बढ़ने से आंखें, स्किन पर प्रभाव पड़ता है।
फेफड़ों पर वायु प्रदूषण की समस्या बड़ी बन सकती है। अस्थमा और सांस के मरीजों को दिक्कत बढ़ जाती है। ऐसे मरीजों को सुबह शाम घर से नहीं निकलना चाहिए। लाेगों को घर से निकलते समय मास्क लगाना चाहिए या गमछे से मुंह ढक लेना चाहिए।