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Kushinagar News: नौ साल के बालक की करतूत से पुलिस परेशान, बचा बवाल

Tue, 30 Jun 2026 02:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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खड्डा। क्षेत्र के कोहरगड्डी गांव में निकले मुहर्रम के जुलूस का वीडियो भड़काऊ भाषण के साथ सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। इसको लेकर सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने लगा। सक्रिय हुई पुलिस की जांच में पता चला कि नौ वर्ष का बालक अपने पिता के मोबाइल से इंस्टाग्राम पर रील देखकर भड़काऊ गाना लगाकर वायरल कर दिया था। पुलिस ने पिता को समझाया और बच्चों को मोबाइल नहीं देने की चेतावनी दी। पुलिस की जांच में सच्चाई सामने आने के बाद लोग शांत हुए।
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कोहरगड्डी गांव में मुहर्रम के दिन डीजे के साथ ताजिया का जुलूस निकाला गया था। युवक ने जुलूस का वीडियो अपने इंस्टाग्राम और फेसबुक आईडी पर अपलोड किया था। गांव का अंडा विक्रेता का नौ वर्षीय बेटा अपने पिता के मोबाइल पर इंस्टाग्राम पर यह वीडियो देखा और धार्मिक भड़काऊ भाषण के साथ वीडियो कई ग्रुपों में वायरल कर दिया। इसकी जानकारी पिता को नहीं थी। मामला बढ़ने के बाद पुलिस अंडा विक्रेता के घर पहुंची और उसका मोबाइल चेक करने के बाद पूरा मामला बताया तो अंडा विक्रेता सन्न रह गया। उसने बताया कि नौ वर्ष का मेरा बेटा है। यहीं शाम को मोबाइल चला रहा था। पुलिस की पूछताछ में बालक ने बताया कि वह इंस्टाग्राम देख रहा था। इस दौरान वह वीडियो आया। नीचे सांग बदलने का ऑप्शन का सिग्नल दे रहा था। उसे दबा दिया तो दूसरा बजने लगा। पुलिस ने पिता और उसके माता को फटकार लगाई और बच्चों को मोबाइल देने से मना किया। सीओ बीके सिंह ने बताया कि वीडियो वायरल होने के बाद इसकी जांच कराई गई। नौ साल का एक बालक अपने पिता के मोबाइल से भड़काऊ गाना वीडियो पर लगाकर पोस्ट कर दिया था। माता-पिता को फटकार लगाई गई।

मासूम उम्र में नफरत की सोच आखिर कहां से आई?

खड्डा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो प्रकरण ने क्षेत्र में गंभीर चर्चा छेड़ दी है। मामले में पुलिस की प्रारंभिक जांच में 12 वर्षीय बच्चे द्वारा वीडियो एडिट कर उसमें आपत्तिजनक आवाज जोड़कर उसे प्रसारित करने की बात सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी कम उम्र में एक बच्चे के विचारों में नकारात्मक और आपत्तिजनक सोच का असर आखिर कैसे पहुंचा।
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लोगों का मानना है कि बच्चे जन्म से नफरत नहीं सीखते, बल्कि उनका परिवेश, परिवार का माहौल, मोबाइल और सोशल मीडिया का अनियंत्रित उपयोग उनके विचारों को प्रभावित करता है। ऐसे में यह मामला केवल एक बच्चे की गलती नहीं, बल्कि समाज और अभिभावकों के लिए भी गंभीर आत्ममंथन का विषय बन गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि एक मासूम उम्र का बच्चा आपत्तिजनक सामग्री तैयार करने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने तक कैसे पहुंच गया। क्या बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर पर्याप्त निगरानी हो रही है, और क्या उन्हें सोशल मीडिया के सही उपयोग और दुष्प्रभावों की पर्याप्त जानकारी दी जा रही है? यह घटना केवल कानूनी कार्रवाई का विषय नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतावनी भी मानी जा रही है, जिसमें बच्चों के हाथों में मोबाइल देने के साथ-साथ उनके मानसिक और वैचारिक विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
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