पडरौना। कविताएं भावाभिव्यक्ति हैं, जो तत्समय उत्पन्न परिस्थितियों पर आधारित होती हैं। इसके अलावा भाव को शब्द में व्यक्त करती हैं। उत्पन्न परिस्थितियों के अनुरूप शब्दों का चयन और उसे पंक्तिबद्ध किया जाना व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रत्यक्ष करती हैं।
ये बातें राजकीय पीजी कॉलेज सोनभद्र के पूर्व प्राचार्य डाॅ. सुधाकर तिवारी ने कहीं। वे सोमवार को उदित नारायण पीजी कॉलेज के सभागार में निराला शब्द संवाद मंच की तरफ से आयोजित 23वीं कवि गोष्ठी और वार्षिकोत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कजरी, सोहर आदि रचनाओं के संंबंध में चर्चा की। इसके बाद डाॅ. रामनरेश दूबे, डाॅ. प्रेमचंद्र सिंह, जितेंद्र पांडेय, मदन मोहन पांडेय, रामनरेश शर्मा, भूपेंद्र राय गवार, राणा प्रताप सिंह, प्रभुनाथ गुप्त, सुरेंद्र प्रसाद गोपाल, अभिमन्यु पांडेय मन्नू, सत्यप्रकाश शुक्ल आदि ने कविता पाठ किया। गोष्ठी की अध्यक्षता निराला शब्द संवाद मंच के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश दिवेदी ओम और संचालन डाॅ. संजय मिश्र ने किया।
इस दौरान जितेंद्र पांडेय जौहर, हरेंद्र पांडेय आदर्श, उगम चौधरी मगन, स्नेहा मिश्रा, माधुरी मधु, डाॅ.कालिन्दी बृजेश, आकाश महेशपुरी, फिरोज अश्क, अवध किशोर अवधु, नथुनी प्रसाद कुशवाहा उर्फ रामपत रसिया, दीपराज दीपक, गोमल यादव, डाॅ. संजय मिश्र मौजूद रहे।