पडरौना। पिछले 10 दिन में चार बार पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ने से परिवहन खर्च बढ़ गया है। इससे दैनिक उपभोग की वस्तुएं जैसे सरसों का तेल, दूध, चावल के दाम बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर रसोई पर पड़ने लगा है। ट्रांसपोर्टर भी माल ढुलाई की दर प्रति क्विंटल 10 रुपये बढ़ाने की तैयारी में है। इसके बाद हर सामान का दाम बढ़ जाएगा। उसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से स्थानीय माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है। इससे दैनिक उपयोग की वस्तुएं महंगी हो गई हैं। बाजार में दूध, सरसों के तेल और चावल समेत रोजमर्रा की चीजों की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। इससे मध्य वर्गीय परिवार का बजट चरमरा गया है। शहर के किराना व्यापारी सुनील मद्धेशिया, अजय शर्मा, विवेक मिश्र आदि ने बताया कि पहले पैकेट बंद सरसों का तेल 176 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, वह अब बढ़कर 180 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
इसी तरह करीब एक सप्ताह पहले तक 4,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बंद बोरा का चावल मिल रहा था, जिसमें एक हजार रुपये का इजाफा हुआ है। इसके चलते चावल 5,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। महंगाई की चौतरफा मार से गृहणियों के लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा है, तो बाजार में छाई मंदी और बढ़ती लागत ने व्यापारियों की भी चिंता बढ़ा दी है। दुग्ध उत्पादन कंपनियां भी अपने वाहनों से जगह-जगह आपूर्ति करती हैं। उनकी परिवहन लागत बढ़ गई है। डेयरी विक्रेताओं ने भी दुग्ध उत्पादों की कीमत बढ़ा दी है।
डेयरी कंपनियों के लोगों का कहना है कि शहर और आसपास से दूधिया अपने वाहनों से दूध पहुंचाते हैं। परिवहन का खर्च बढ़ने से उन्हों ने दूध का दाम बढ़ा दिया है। कंपनी में पैकिंग के बाद पुन: दुकानदार तक भिजवाना पड़ता है, जिससे चलते खर्च बढ़ा है। इस खर्च को वहन करने के लिए पैकेट दूध में तीन रुपये का इजाफा किया गया है। दूध बेचने वाले दुकानदार विजय मद्धेशिया, अजय मोदनवाल, विपिन चौरसिया ने बताया कि पैकेट वाला दूध पहले 808 में एक क्रेट (12 लीटर) मिलता था, जो अब बढ़कर 840 रुपये प्रति क्रेट हो गया है। इसी तरह एक अन्य कंपनी का एक क्रेट दूध पहले 816 रुपये में मिलता था, जो अब 856 रुपये होगया है। दूध का दाम बढ़ने से बाजार में पनीर, घी, खोआ समेत अन्य दुग्ध उत्पाद के दाम बढ़ गए हैं।
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दैनिक जरूरतों का सामान जैसे चावल, तेल, सर्फ और दूध के दाम बढ़ गए हैं। इससे किचन का बजट गड़बड़ा गया है। दुकानदार बता रहे हैं कि दाम में इजाफा होने की वजह पेट्रोलियम पदार्थों का दाम बढ़ना है। दुकानदार दैनिक जरूरतों के दाम में और बढ़ोतरी का अंदेशा जता रहे हैं। इससे चिंता बढ़ गई है। -संध्या केशरी, गृहिणी।
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जैसे-जैसे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहें वैसे-वैसे सामान बनाने के अलावा बाजार तक पहुंचाने का खर्च बढ़ने लगा है। घाटा पूरा करने के लिए दाम में इजाफा करना मजबूरी है। करीब दस दिन में चार बार डीजल-पेट्रोल के दाम में हुई बढ़ोतरी से कारखाने में बन रहे सामान के दाम 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाने पड़े हैं। -वासिम अहमद, उद्यमी।
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गांव से दूधिया अपने साधन से दूध लाते हैं। पेट्रोल का दाम बढ़ने से परिवहन खर्च बढ़ गया है। दूध का दाम प्रति लीटर एक रुपया बढ़ा दिया है। फैक्टरी में पैकिंग कर उसे बाजार तक पहुंचाने का खर्च बढ़ गया है। पैकेट बंद दूध की कीमत में दो से तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। -रविकांत यादव, उद्यमी।
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पेट्रोलिंयम पदार्थों की कीमत बढ़ने से कानपुर, लखनऊ, दिल्ली समेत अन्य शहरों से सामान मंगाना महंगा हो गया है। हालांकि, अभी बाहर से आने वाले सामान का भाड़ा नहीं बढ़ाया गया है, लेकिन शीघ्र 8 से 10 रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा बढ़ जाएगा। इसके लिए ट्रांसपोर्टर और व्यापारियों में वार्ता चल रही है। - जीतेंद्र मिश्र, ट्रांसपोर्टर।