सेवरही क्षेत्र के खेतों में लगी गन्ने की फसल।संवाद
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पकड़ियार बाजार। अप्रैल की बढ़ती गर्मी ने गन्ना किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तापमान में इजाफा होने के साथ ही खेतों में कीटों का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जिससे फसल को भारी नुकसान पहुंच रहा है। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में हालात ऐसे हैं कि गन्ने के पौधे शुरुआती अवस्था में ही सूखने लगे हैं।
क्षेत्र में इस समय चोटी बेधक, तना बेधक और अंकुर बेधक जैसे खतरनाक कीट सक्रिय हो गए हैं। गेहूं और सरसों की कटाई के बाद बदले वातावरण का सीधा असर गन्ने की फसल पर पड़ा है, जिससे कीटों का दबाव और बढ़ गया है। अंकुर बेधक की सूंडी पौधे के अंदर घुसकर बीच की पत्ती को सुखा देती है, जिसे ‘डेड हार्ट’ कहा जाता है। वहीं चोटी बेधक फसल की बढ़वार को रोककर उत्पादन पर सीधा असर डाल रहा है। खेतों में नमी की कमी के चलते दीमक का प्रकोप भी बढ़ गया है, जो पौधों की जड़ और तने को अंदर से खोखला कर रही है। किसानों का कहना है कि बढ़ती गर्मी के कारण कीटनाशकों का छिड़काव भी प्रभावी नहीं हो पा रहा। किसान रामबहाल ने बताया कि इस साल बोई गई गन्ने की फसल के पौधे तेजी से सूख रहे हैं। तना खींचने पर अंदर से सड़ा हुआ निकल रहा है। वहीं किसान मुखलाल ने कहा कि टॉप बोरर का असर इतना ज्यादा है कि दवाएं भी बेअसर साबित हो रही हैं।
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इन कीटों का बढ़ा प्रकोप:
गन्ने की फसल में इस समय टॉप बोरर, अर्ली शूट बोरर, व्हाइट ग्रब और दीमक का प्रभाव सबसे अधिक देखा जा रहा है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
कृषि विशेषज्ञ श्यामबदन शर्मा का कहना है कि किसान नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करें और प्रभावित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट कर दें। जरूरत के अनुसार कीटनाशकों का छिड़काव करें और खेत में नमी बनाए रखें। समय पर सिंचाई करने से कीटों का प्रकोप काफी हद तक कम किया जा सकता है।