एपी तटबन्ध कटने के बाद गांवो में पानी भरने के बाद बंधे पर पाल तान कर शरण लिए लोग।संवाद
बरवापट्टी। खैरटिया गांव के 23 घरों में बाढ़ का पानी घुस जाने से चारों तरफ अफरा-तफरी मची है। जगह-जगह शरण लिए लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। मंगलवार सुबह से ही प्रशासन की ओर से बचाव कार्य शुरू हो गया। जिसमें खाद्य सामग्री और उपचार मुहैया कराए गए। तमाम बाढ़ पीड़ितों को चूड़ा और गुड़ खाकर रात गुजारनी पड़ रही है।
गांव के पश्चिमी हिस्से में घुसे बाढ़ के पानी को नदी में वापस भेजने के लिए सड़क पर बने एक छोटे बांध को छोड़ दिया गया। हालांकि, ग्रामीणों को हुए नुकसान की भरपाई को लेकर चिंता बनी हुई है। लोगों की लगी-लगाई फसलें और काटकर घर में रखा अनाज बाढ़ के पानी में बह गया। खैरटिया निवासी शर्मा तिवारी ने बताया कि प्रशासन की मदद सराहनीय है। लेकिन खेतों में उपजी और घर में रखी फसलें बर्बाद हो गई हैं। उन्होंने बच्चों के भविष्य की चिंता व्यक्त की। रविंद्र तिवारी ने कहा कि पानी तो कुछ कम हुआ है। लेकिन खाना बनाने और बच्चों को सोने में बड़ी परेशानी हो रही है। उन्हें दोबारा नदी का जल स्तर बढ़ने का डर है।
शर्मा तिवारी ने बताया कि प्रशासन की तरफ से हर चीज मुहैया कराई जा रही हैं परंतु खेतों में उपजी फसल और कुछ लोगों द्वारा घर में रखा गया अनाज सब बाढ़ में बर्बाद हो गया। इसकी भरपाई कैसे होगी, यह सोच-सोचकर बुरा हाल है। आगे बच्चे क्या खाएंगे, यह चिंता उन्हें सता रही है।
दैनिक जीवन की चुनौतियां और शासन पर आरोप
-रविंद्र तिवारी ने कहा कि पानी कम हुआ ह, लेकिन खाना बनाने और बच्चों को सुलाने में बड़ी परेशानी हो रही है। उन्हें डर है कि कहीं दोबारा नदी का जल स्तर न बढ़ जाए। घुटन तिवारी ने आरोप लगाया कि शासन उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। इसी के परिणाम स्वरूप तीन दिनों से घरों में चूल्हा नहीं जला है। बच्चे और परिवार के लोग चूड़ा, लाई और गुड़ खाकर गुजारा कर रहे हैं।