लापरवाही में सूख रहे पौधे, विभागीय अधिकारी बेपरवाह
पहले चरण में ही खुली पोल, सरकारी विभाग लगा रहे अभियान को पलीता
- पांच जुलाई को रोपने के लिए मंगाए थे पौधे, अधिकांश जगहों पर नजर आई लापरवाही
संवाद न्यू एजेंसी
पडरौना (कुशीनगर)। जिले के भीतर हरियाली बढ़ाने के अभियान पर सरकारी विभागों के जिम्मेदारों की लापरवाही भारी पड़ने लगी है। पौधरोपण के पहले चरण में मंगाए गए सैकड़ों पौधों को रोपा नहीं गया। रोपाई न होने से बचे हुए पौधों को जिम्मेदारों ने लावारिस हाल छोड़ जिससे पौधे सूखने लगे हैं। बरसात न होने के कारण जहां पौधों को पानी नहीं मिल पा रहा है। वहीं पौधशाला से मंगाए गए पौधों की सुरक्षा को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। प्रभागीय वनाधिकारी ने कहा कि पौधों को नर्सरी से ले जाने वाली संस्था उनकी देखभाल करती हैं। पहले चरण में कितना पौधरोपण हुआ है। इसका आंकड़ा सभी विभागों से मांगा गया है।
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जिले के भीतर तीन चरणों में 40 लाख 39 हजार 10 पौधे रोपने की तैयारी की गई है। तीन चरणों में सरकारी विभागों से लेकर गांव- गांव तक पौधरोपण किया जाएगा। पहले चरण की शुरूआत सात जुलाई को हुई जिसमें 28 लाख 85 हजार आठ सौ पौधे रोपने का लक्ष्य था। वन विभाग द्वारा नौ लाख 55 हजार आठ सौ, पर्यावरण विभाग का एक लाख छह हजार तीन सौ, ग्राम्य विकास विभाग का 10 लाख 98 हजार, राजस्व विभाग का एक लाख 25 हजार सहित कुल 27 सरकारी विभागों द्वारा पहले दिन 28 लाख 85 हजार आठ सौ पौधे रोपने का निर्देश दिया गया था। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर विभाग ने वन विभाग की नर्सरी से पौधे मंगवाए थे। पहले चरण में पौधरोपण के दौरान बच गए पौधों को लावारिस हाल छोड़ दिया गया है जिससे उनके सूखने की नौबत आ गई है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी महकमे हरियाली बढ़ाने को लेकर कितने गंभीर हैं।
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तय हुआ था यह लक्ष्य
- जनपद में कुल 40 लाख 39 हजार 10 पौधे रोपे जाने का लक्ष्य निर्धारित है।
- सभी पौधों को तीन चरणों में लगाया जाएगा। सात जुलाई को पहले चरण की शुरूआत हुई।
- 28 लाख 85 हजार आठ सौ पौधे रोपने का लक्ष्य का तय किया गया था।
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इस हाल में रोपण के लिए लाए गए पौधे
केस एक : रेलवे लाइन के किनारे पानी का अभाव, सूख रहे पौधे
दुदही रेलवे स्टेशन किनारे करीब चार किलोमीटर तक 20 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। सात जुलाई को पौधरोपण के लिए पांच हजार पौधे मंगाए गए थे। लेकिन सिर्फ एक हजार पौधे ही लग सके। चार हजार पौधे रेलवे लाइन के किनारे रखे गए हैं जो पानी के अभाव में रहे हैं। वन रक्षक तेज बहादुर यादव और प्रमोद पटेल को पौधों के देखभाल की जिम्मेदारी गई है। वन रक्षकों का कहना है कि पानी की सुविधा नहीं है। इसलिए पौधे सूख जा रहे हैं। बारिश होने से पौधे बचे रहते। हम लोग किसी तरह से बाल्टी से पानी डालते हैं।
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केस दो: थाना परिसर में सूखकर खराब हो गए पौधे
कसया थाना परिसर में भी पौधरोपण का आयोजन किया गया था। इस मौके पर सौ से अधिक सागौन के पौधे मंगाए गए थे। इनमें पौधरोपण के दौरान जो पौधे बच गए। वह पानी के अभाव में सूख गए। 50 से अधिक पौधे सूखकर खराब हो गए। इस संबंध में एसएचओ कसया सुधीर सिंह ने बताया कि पौधों को नियमित पानी दिया जा रहा था। बावजूद इसके पौधे सूख गए।
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वर्जन
पौधशाला से विभिन्न विभागों को पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। पौधों को रोपने, उनकी देखभाल सहित अन्य जिम्मेदारी संबंधित विभाग के लोगों की होती है जो पौधे लगाते हैं। वन विभाग की तरफ से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है। उनको सूखने से बचाने के लिए पानी दिया जा रहा है। जनपद में पहले चरण के कुल पौधरोपण का आंकड़ा तैयार कराया जा रहा है।
अनिल कुमार श्रीवास्तव, जिला प्रभागीय वनाधिकारी, कुशीनगर
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अरुण कुमार