खेसिया किसान सेवा सहकारी समिति पर गेहूं की खरीदारी करते कर्मचारी। संवाद
पडरौना। प्रशासन गेहूं खरीद के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसके बाद भी लक्ष्य की पूर्ति होते नहीं दिख रही है। खेतों में फसल कट चुकी है, ऐसे में आढ़ती केंद्र प्रभारियों के डोर-टू-डोर पहुंचने से पहले डीलिंग कर ले रहे हैं और अफसर कागजों में दम भर रहे हैं। आढ़ती बोरे में गेहूं भर सरकारी रेट से अधिक देकर खरीद करने में लगे हैं। ऐसे में गेहूं खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। यही नहीं किसानों के आवेदन का आंकड़ा की तुलना पिछले वर्ष से कर लें तो यह पिछले बार से सीधे आधा से कम है ऐसे में जब आवेदन ही कम है तो इसी से किसानों का रुझान सीधे तौर पर समझा जा सकता है।
पहले क्रय केंद्रों पर किसान लाइन लगाए रहते थे। क्रय केंद्र प्रभारी पर खरीद में धांधली के आरोप भी लगाते थे। इस साल क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। जिले में गेहूं खरीदने के लिए पहले से अधिक क्रर्य केंद्र भी बनाए गए लेकिन किसानों ने सरकारी से मुंह फेर लिया है और इसका फायदा आढ़ती उठा रहे हैं। गेहूं खरीद की सुस्ती शुरुआती दौर से ही रही है। अफसरों के निर्देश के बावजूद सिर्फ कागजों में आदेश-निर्देश जारी किया गया, जिले में गेहूं खरीद के लिए शासन से 23,500 मीट्रिक टन लक्ष्य निर्धारित किया। विभिन्न खाद्य शाखा, पीसीएफ, पीसीयू, एनसीसीएफ और भारतीय खाद्य निगम सहित अन्य एजेंसियों के कुल 84 क्रय केंद्र पर खरीद की शुरुआत हुए 39 दिन हो गए हैं लेकिन लक्ष्य बहुत दूर नजर आ रहा है।
40 मोबाइल टीम सक्रिय होने और केंद्र प्रभारियों के डोर टू डोर जाकर राजी करने के बावजूद आढ़ती सरकारी रेट से अधिक रेट और कम अड़चन से किसानों को लुभाने में सफल हो रहे हैं और यही कारण है कि तमाम प्रयासों के बावजूद खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। हालांकि विभाग कह रहा है कि गेहूं के कटने के बाद अब खरीद में गति आएगी लेकिन हकीकत तो यह है कि 30 फीसदी उपज को खेतों से और 30 फीसदी दरवाजे से आकर आढ़तियों ने बिना किसी सत्यापन और रजिस्ट्रेशन के खरीद लिया है। विभाग महज अब 40 फीसदी बचे उपज पर ही जोर लगा रहा है।इस साल अबतक किसानों ने जो आवेदन किए हैं वो पिछले वर्ष से कम है जबकि अबतक 25 हजार क्विंटल के आसपास ही खरीद हो सकी है। ऐसे में लक्ष्य हासिल करना तो दूर विपणन विभाग अपनी प्रतिष्ठा बचाने में लगा है।