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Kushinagar News: किसान की जान जाने के बाद गांव में दौड़े अफसर

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रोते बिलखते परिजन।
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हाटा। क्षेत्र के भिस्वा बाजार गांव किसान मल्लू प्रजापति की मौत के बाद जिम्मेदार सक्रिय हुए और शुक्रवार को गांव में वन विभाग, नगर पालिका और पशु पालन विभाग की टीम पहुंंची। छुट्टा पशुओं को करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद घेराबंदी कर एक पार्क में एकत्रित किया गया। इसके बाद वाहन से खड्डा के कोप जंगल में बने पशु आश्रय केंद्र में ले जाकर छोड़ा गया।
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गांव वालों का कहना था कि इसके पूर्व कई बार शिकायत किया गया था, लेकिन कोई नहीं सुन रहा था, अगर पहले ही जिम्मेदार इसे गंभीरता से लिए होते तो शायद किसान की जान नहीं गई होती। वहीं घायल किसान मिट्ठू की यादव के स्वास्थ्य में सुधार बताया जा रहा है। शुक्रवार को भी तहसीलदार जया सिंह गांव में पहुंची और पीड़ित परिवार से मिली। गांव वालों को छुट्टा पशुओं को अभियान चलाकर पकड़वाने का आश्वासन दिया। भिस्वा बाजार गांव निवासी मल्लू प्रजापति (45) मिट्ठू यादव (62) बृहस्पतिवार की शाम को खेत में काम कर रहे थे, इस दौरान छुट्टा पशुओं का झुंड खेत में पहुंच गया। मल्लू प्रजापति की फसल नुकसान पहुंचा रहे पशुओं को भगाने गए तो पशुओं का झुंड किसान पर हमला बोल दिया, बचाव करने गए मिट्ठू यादव पर भी हमला कर घायल कर दिया। इसमें मल्लू की मौत हो गई, जबकि मिट्ठू का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
इस घटना के बाद गांव वालों में आक्रोश बढ़ गया और प्रशासन हरकत में आ गया। शुक्रवार को नगर पालिका हाटा, पशु पालन विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम गांव में करीब 10 बजे पहुंची। ग्रामीणों की मदद से इलाके में घूम रहे सभी छुट्टा पशुओं को एक पार्क में घेराबंदी कर एकत्रित किया गया। इस दौरान पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी तैनात रही। बाद में नगर पालिका की कैटल वैन में पशुओं को भरकर खड्डा क्षेत्र के कोप जंगल में बने पशु आश्रय केंद्र भेजा गया। गांव वालों का कहना है कि गांव में लंबे समय से छुट्टा पशुओं का आतंक था। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो रही थीं और कई बार लोग हमले का शिकार भी हुए, लेकिन प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए। लोगों का आरोप है कि यदि पहले ही पशुओं को पकड़ कर आश्रय केंद्र भेज दिया गया होता तो यह हादसा टल सकता था। गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। गांव में अभी भी दहशत का माहौल है।
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क्षमता से अधिक रखे गए पशु
: हाटा नगर पालिका के कान्हा पशु आश्रय केंद्र की क्षमता 26 पशु रखने की है, लेकिन वर्तमान समय में 38 पशु यहां रखे गए हैं। पशु आश्रम केंद्र में क्षमता से अधिक पशु रखने की वजह से और छुट्टा पशुओं को रखने में दिक्कत हो रही है। यही कारण है कि क्षेत्र में तमाम जगहों पर पशु घूमते हुए दिख रहे हैं। कभी-कभी उनके हमलावर होने की वजह से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। तमाम लोग छोटा पशुओं के हमले से अलग-अलग घटनाओं में चोटिल हो चुके हैं। लोग छुट्टा पशु के अस्थाई समाधान की मांग कर रहे हैं।
रखने की है जगह, लेकिन बरती जा रही लापरवाही : खड्डा के कोप जंगल में दो पशु आश्रय केंद्र बना है। दोनों 500 पशुओं को रखने की क्षमता है। वर्तमान में 390 पशु रखे गए हैं, इसमें 110 पशुओं को रखने की जगह है। डिप्टी सीवीओ विद्याराम वर्मा ने बताया कि छुट्टा पशुओं में साड़ या बछड़ों को यहां पर रखा गया है। जिले में अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर इसमें रखा जाएगा।
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