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Kushinagar News: ओडीओपी को बढ़ावा, लोकल से ग्लोबल बनेगा केले का उत्पाद

Tue, 03 Feb 2026 12:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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केला से जुड़े उत्पाद बनातीं महिलाएं। स्रोत-सोशल मीडिया        
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पडरौना। केंद्र सरकार के बजट में ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) योजना को मजबूती देने के संकेतों ने स्थानीय उत्पादों से जुड़े उद्यमियों में नई उम्मीद जगा दी है। अगर सही ढंग से यह परवान चढ़ा तो केले के लोकल प्रोडक्ट ऑनलाइन बाजार के माध्यम से ग्लोबल तक पहुंच सकते हैं। इसी कड़ी में जनपद में केले के वेस्ट से पोषक आहार तैयार कर रही महिला उद्यमी की पहल अब बड़े बाजार तक पहुंचने की आस में है।
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बजट के प्रावधानों से ऐसे नवाचारों को वित्त, प्रशिक्षण और विपणन सहायता मिलने की संभावना बढ़ी है। जनपद में लंबे समय से केला उत्पादन होता रहा है, लेकिन फल के अलावा उसके तने, फूल और अन्य हिस्सों का उपयोग सीमित था। अब स्थानीय स्तर पर केले के वेस्ट से पोषक खाद्य पदार्थ तैयार करने की पहल ने इसे एक नए उद्योग के रूप में पहचान दिलानी शुरू कर दी है। इस तरह के उत्पाद न सिर्फ पोषण से भरपूर हैं बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक बन रहे हैं।
कुशीनगर जनपद में खड्डा लगायत दुदही, तमकुही क्षेत्र में केला का उत्पादन होता है।केला उत्पादन वाले क्षेत्रों में आमतौर पर फल के अलावा तना, फूल और अन्य हिस्से बेकार चले जाते थे। तमकुही क्षेत्र की बनरहा मोड पश्चिम पट्टी निवासी अनीता राय ने इसी वेस्ट को अवसर में बदलते हुए केले के तने का जूस, फूल का अचार, फाइबर आधारित उत्पाद और पोषणयुक्त खाद्य सामग्री बनानी शुरू की।
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उनका प्रयास न सिर्फ खाद्य नवाचार है, बल्कि किसानों की अतिरिक्त आय और महिलाओं के रोजगार से भी जुड़ा है। अब जब बजट में ओडीओपी के तहत प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और एमएसएमई सेक्टर को सहयोग देने की घोषणा से ऐसे उत्पादों को तकनीकी व वित्तीय सहारा मिलने की उम्मीद बढ़ी है। यदि स्थानीय उत्पादों को ई-कॉमर्स और निर्यात से जोड़ा गया तो केले से बने ये पोषक आहार लोकल से ग्लोबल की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
अनीता का कहना है कि सरकारी सहयोग, आसान ऋण और प्रशिक्षण सुविधाओं से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। उनके साथ काम कर रहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी इसे आत्मनिर्भरता की राह मानती हैं।
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