पडरौना/खड्डा। जिले में बालू खनन के लिए एक भी स्थानों पर पट्टा नहीं हुआ है, लेकिन जिम्मेदारों की मिलीभगत और सफेदपोशों के शह पर छोटी और बड़ी गडंक नदी में दस से अधिक स्थानों पर बालू खनन का खेल चल रहा है। अधिकांश घाटों पर रात को जेसीबी मशीन की मदद से बालू खनन की जा रही है। जिले में बालू माफियाओं का गिरोह सक्रिय है। इन पर अंकुश लगाने में पुलिस-प्रशासन नाकाम है।
खनन कर बालू ले जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बैठे मजदूर की बृहस्पतिवार रात मौत हो गई। अधिकारी की गाड़ी देख ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर भागने के दौरान इस पर बैठा मजदूर गिर गया। यह पहला मामला नहीं है। बल्कि, बालू खनन के दौरान कई घटनाएं हो चुकी है। मगर, सबकुछ जानने के बाद भी जिम्मेदार इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। खड्डा तहसील क्षेत्र के किसानों ने कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सफेद बालू के काले कारोबार पर रोक नहीं लग पा रही है। सफेद बालू का काला धंधा कुशीनगर जिले के छोटी और बड़ी गंडक नदी में शाम ढलते शुरू हो जाता है और पौ फटने से पहले बंद हो जाता है।
जिले के रामकोला, खड्डा, हनुमानगंज, नेबुआ नौरंगिया, कप्तानगंज, हाटा, पडरौना, जटहा बाजार, कसया और सेवरही थाना क्षेत्र के अलग-अलग घाटों पर सफेद बालू की खनन की जा रही है। इसमें जिले के कई सफेदपोश भी शामिल हैं और इनके मालवाहक भी बालू की ढुलाई में लगे हैं। जिले से देवरिया, महराजगंज और गोरखपुर तक सफेद बालू की सप्लाई की जाती है। नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के मकुनही घाट, बेलवा के अलावा देवतहा गंडक नदी में बालू का खनन स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से होता है। हनुमानगंज थाना क्षेत्र के पनियहवा के समीप करीब पांच एकड़ से अधिक जमीन में बालू का खनन हो रहा है। खड्डा के महदेवा गांव के प्रधान प्रतिनिधि नथुनी कुशवाहा व अन्य ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन व पुलिस से कई बार शिकायती पत्र देकर बालू खनन पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन जिम्मेदारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिम्मेदारों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। महादेवा गांव के किनारे प्रतिदिन रात में बालू खनन की जा रही है। इसके चलते किसानों की जमीन गड्ढे में तब्दील होती जा रही है।
सूत्रों की मानें तो बालू खनन के धंधे में ऐसे लोग शामिल हैं, जिनका स्थानीय थाने से लेकर खनन विभाग की तक तगड़ी सेटिंग हैं। यही वजह है कि जिम्मेदार इन पर शिकंजा नहीं कस पा रहे हैं। इसके अलावा हनुमानगंज थाना क्षेत्र के पनियहवा पुल पास से शाम होते ही ट्रैक्टर-ट्राॅली नीचे उतर कर गंडक नदी के किनारे दियारा में पहुंच जातीं हैं। जेसीबी की मदद से मजदूर बालू की खनन करते हैं। कई ऐसे घाट है, जहां दिन में ही नाव से बालू निकाला जाता है। पनियहवा से बालू लेकर निकले वाली ट्रैक्टर-ट्राॅली एनएच 727 के रास्ते निकलती हैं। प्रति ट्राॅली बालू की कीमत 4500 से लेकर छह हजार रुपये है।