सीएचसी में फर्श पर बैठे मरीज। संवाद
दुदही। सीएचसी दुदही पर प्रतिदिन पांच सौ से अधिक मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल में व्यवस्था बदहाल है। एक तरफ जहां पेयजल के लिए मरीजों और तीमारदारों को भटकना पड़ता है। वहीं मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ता है और जांच के लिए भी डॉक्टर लिखते हैं। गायनी की तैनाती नहीं होने के कारण महिलाओं को प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
दुदही में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए 30 शैया का सीएचसी का निर्माण कराया गया, लेकिन यह सीएचसी अपने उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रही है। कर्मचारियों कि कमी के चलते मरीजों को घंटाें इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता है। सीएचसी में प्रत्येक दिन 500 से अधिक ओपीडी में मरीज इलाज के लिए आते हैं। सेवानिवृत होने के बाद किसी चीफ फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हुई और स्टाफ नर्स की कमी है।
कोई गायनी महिला चिकित्सक नहीं होने से महिलाओं को निजी अस्पताल में या मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। इसके लिए मरीजों को अधिक रुपये खर्च करने के साथ ही साथ जान गवानी पड़ जाती है। मरीजों के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। मरीजों के बैठने के लिए 30 कुर्सी भी हाल में लगी थी, उसे कुछ कर्मचारी अपने कमरे में रख लिए हैं। वार्डों में लगी खिड़कियों की जाली फटी हैं। जरनेटर काफी दिनों से खराब पड़ा है। बिजली रहती है तो एक्सरे होता है, नहीं तो निजी केंद्रों पर मरीजों को जाना पड़ता है। करीब सात साल पहले स्वीपर की मौत हो गई। तब से आज तक किसी स्वीपर की तैनाती नहीं हो सकी। चार दिनों से कैंपस में पानी लगा हुआ है। एम्बुलेंस से मरीज आने पर काफी दूर पर मरीजों को उतरना पड़ रहा है। कुछ पानी प्रभारी चिकित्साधिकारी ने कुछ पानी निकलवाया है।