नेपाली जंगली भैंस बने लोगों की जान के दुश्मन
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बढ़ते मानव से भटकर आबाद में आ रहे वन्य जीव
खड्डा(कुशीनगर)। जनपद से सटे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में शिकारियों की बढ़ती दखल से वन्य जीव भटककर आबादी में आ जा रहे हैं। इससे वन्य जीवों और मानव जीवन के लिए खतरा उत्पन्न होता जा रहा है। इन दिनों जंगली भैंसा भटककर आबादी की तरफ आ गए हैं। कई लोगों को जंगली भैंस घायल कर चुके हैं। बाइक देखकर ये आपा खो दे रहे हैं। इसे देखते हुए राहगीर इन क्षेत्रों से गुजरने से परहेज कर रहे हैं। जबकि वन विभाग अलर्ट पर है।
बिहार प्रांत के 855 वर्ग किलोमीटर में फैले वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से अक्सर वन्य जीव भटककर जिले के आबादी में चले आते हैं। कुछ माह पहले आबादी में आकर बाघ, तेंदुआ और अन्य हिंसक पशु नुकसान पहुंचा चुके हैं। इन दिनों जंगली भैंसा के झुंड ग्रामीणों के लिए काल बने हुए हैं। एक सप्ताह में खड्डा थानाक्षेत्र की सीमा से सटे बिहार के मदनपुर वन क्षेत्र से सटे गोबरहिया गांव के पास भैंसों ने अचानक हमला कर मुन्ना मुसहर, जितेंद्र महतो और भोला कुशवाहा को घायल कर दिया था। बलुआ गांव में बाइक देख जंगली भैंस भड़क गए और हमला कर दिया। बाइक सवार ने किसी तरह भागकर जान बचाई, लेकिन बाइक को भैंसों ने पटक पटककर तोड़ डाला। एक माह पहले जंगली भैंस के झुंड ने एक किसान को मार डाला था। इस नई आफत से बचाव के लिए वन विभाग अलर्ट पर है।
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बाघों का पसंदीदा भोजन है जंगली भैंस
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगलों में पहली बार वर्ष 1996-97 में छह की संख्या में नेपाली जंगली भैंस-भैंसा को तत्कालीन डीएफओ डीके शुक्ला एवं अन्य अधिकारियों ने देखा था। उसके बाद से इनकी संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती गई। वर्तमान में इनकी संख्या 500 से ज्यादा आंकी जा रही है। बाघों के सबसे पसंदीदा भोजन में शुमार जंगली भैंसों को वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के जंगलों में बने अधिवास में प्रचुर मात्रा में भोजन मिलता है। वन विभाग के जानकारों के मुताबिक बाघ जंगली भैंसों के शिकार के बाद कई दिनों तक बड़े ही चाव से खाते हैं। इनका वजन पांच से सात क्विंटल तक का होता है।
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कोट
जंगली भैंस के प्रजनन का समय शरद ऋतु है। यह नौ से 11 महीनों के बीच बच्चे को जन्म दे देती हैं। ये भैंस अपने जीवन काल में पांच बच्चों को ही जन्म देती हैं। नर शावक दो वर्ष की ही उम्र में झुंड छोड़कर कहीं और चला जाता है। आमतौर पर मादा और उसके बच्चे एक साथ झुंड में रहते हैं। इनकी बढ़ती संख्या के चलते इनकी गिनती कराने के लिए डब्ल्यू डब्ल्यू एफ के सहयोग से कवायद शुरू की जा रही है।
-नेशामणि, वन संरक्षक, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व