पडरौना। स्कूल संचालकों की लापरवाही छात्रों पर भारी पड़ रही है। जिले के परिषदीय, माध्यमिक और प्राइवेट स्कूलों ने यू-डायस पोर्टल पर करीब एक लाख छात्रों को अगली कक्षा में इम्पोर्ट नहीं किया है। डाटा अपडेट न होने से इन विद्यार्थियों के सत्यापन और छात्रवृत्ति अटकने की आशंका है। मामले को गंभीरता से लेते हुए बीएसए और डीआईओएस ने ऐसे लापरवाह स्कूल संचालकों को नोटिस भेजकर सात दिन में डाटा अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारिययाें ने चेताया कि समय पर काम न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
नए शैक्षित सत्र में प्रवेश के लिए हर साल स्कूलों को पुराने छात्रों को पोर्टल पर अगली कक्षा में प्रमोट/इम्पोर्ट करना होता है। लेकिन जिले के कई स्कूलों ने यह काम अब तक पूरा नहीं किया है। शिक्षा विभाग की समीक्षा में पता चला कि जिले के कक्षा एक से आठवीं तक के 59262 विद्यार्थियों का अगली कक्षा में नामांकन के बाद भी पोर्टल पर अपडेट नहीं किया गया है। इसी तरह माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से 12वीं तक पढ़ाई कर रहे 49527 विद्यार्थियों को पोर्टल पर अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया गया है। इसके चलते ये सभी छात्र यू-डायस पोर्टल पर अभी भी पिछले सत्र की कक्षा में ही पढ़ते दिख रहे हैं।
डाटा अपडेट न होने के कारण इन विद्यार्थियों को नए सत्र में नामांकन का मिलान नहीं हो पा रहा। यही नहीं समाज कल्याण विभाग छात्रवृत्ति के लिए यू-डायस डाटा मांगता है। इम्पोर्ट न होने पर यू-डायस पोर्टल पर अपडेट नहीं होने वाले विद्यार्थियों का फॉर्म रिजेक्ट हो जाएंगे। इसके अलावा एमडीएम, निशुल्क किताब और यूनिफॉर्म का कोटा भी पोर्टल पर उपलब्ध डाटा पर तय होता है। इन छात्रों का डाटा अपडेट नहीं होने पर उन्हें इन सरकारी योजनाओं से वंचित होना पड़ सकता है। इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि यह शासन की प्राथमिकता है। जिन स्कूलों ने डाटा अपडेट नहीं किया है, उन्हें अंतिम नोटिस दिया गया है। एक सप्ताह में काम पूरा न करने वाले प्रधानाध्यापकों के वेतन से कटौती और प्रतिकूल प्रविष्टि की जाएगी। वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्ता ने बताया कि माध्यमिक स्कूलों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। जिन विद्यालयों ने अभी तक प्रमोशन का डाटा फीड नहीं किया है, उनकी मान्यता और अनुदान प्रभावित हो सकता है। अधिकारियों को भौतिक सत्यापन के आदेश दिए गए हैं।
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