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Kushinagar News: प्रसव के बाद प्रसूता की मौत, लाश लेकर घूमते रहे परिजन

Sat, 22 Feb 2025 12:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना। क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में बृहस्पतिवार की देर शाम प्रसव के बाद एक प्रसूता की मौत हो गई। अस्पताल संचालकों ने हालत गंभीर बताकर गोरखपुर रेफर कर दिया। परिजन शव को लेकर गोरखपुर के एक निजी अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने दो घंटे पहले मौत होने की जानकारी दी। इससे नाराज तीमारदारों ने कसया लौटकर अस्पताल में जमकर हंगामा किया और इसकी पुलिस को सूचना दी। इसी बीच अस्पताल संचालक और कर्मचारी शव बाहर छोड़कर फरार हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। नवजात बच्ची स्वस्थ बताई जा रही है जो परिजनों के पास है।
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हाटा कोतवाली क्षेत्र के थरुआडीह गांव निवासी सुमन देवी (26) की शादी मई में अहिरौली थाना क्षेत्र के नवापार गांव निवासी निरंजन के साथ शादी हुई थी। वह मुंबई में रहता है। घर पर सिर्फ सुमन और इसकी सास थी। प्रसव का दिन नजदीक आया तो सुविधा के लिए सुमन अपने मायके आकर रहने लगी। बृहस्पतिवार को उसे प्रसव पीड़ा हुई तो मायके वालों ने आशा कार्यकर्ता तुलसी प्रसाद को सूचना दी और दोपहर में हाटा सीएचसी पर लेकर पहुंचे। कुछ घंटे इलाज के बाद अस्पताल की स्टाफ नर्स ने सुमन की हालत गंभीर बताते हुए किसी अच्छे अस्पताल में लेकर जाने की बात कही। इसके बाद आशा कार्यकर्ता हाटा कस्बे में हाईवे के किनारे संचालित एक निजी में बेहतर इलाज का झांसा देकर प्रसूता को लेकर चली गई।
सुमन की सास और मां के अनुसार शाम करीब पांच बजे सुमन की अचानक सांसें चलनी बंद हो गई। शोर मचाने पर प्रसूता को गंभीर हालत बताते हुए अस्पताल संचालक ने एंबुलेंस से गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भेज दिया। वहां पहुंचने पर चिकित्सक ने जांच की तो पता चला कि प्रसूता की मौत दो घंटे पहले हो चुकी है। वहां सुमन को उतारने के बाद एंबुलेंस लेकर चालक फरार हो गया। निजी एंबुलेंस कर परिजन शव लेकर हाटा कस्बा स्थित निजी अस्पताल पहुंचे और हंगामा करने लगे। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। मामला बढ़ता देख संचालक और अस्पताल के कर्मचारी मेन गेट पर ताला बंद कर फरार हो गए। आरोप है कि नाराज लोगों ने अस्पताल के अंदर तोड़-फोड़ भी की।
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कोतवाल सुशील शुक्ला ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह स्पष्ट होगी। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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सात जन्मों की खाई थी कसम, दस माह में चल बसी
निरंजन को इसकी जानकारी मिली तो वह फोन पर रोने लगा। रिश्तेदार और परिजन पोस्टमार्टम हाउस पर शाम तक जमे रहे। परिजनों ने बताया कि आशा कार्यकर्ता के चक्कर में पड़कर निजी अस्पताल में लेकर चले गए, उस अस्पताल के बारे में जानकारी तक नहीं थी। स्टाफ नर्स ने भी बिना अस्पताल का नाम लिए हालत गंभीर बताकर अच्छे अस्पताल में ले जाने की बात कही। सुमन की पहली बच्ची है। मई 2024 में इसकी शादी हुई थी। अग्नि को साक्षी मानकर सात जन्म साथ जीने मरने की कसम निरंजन और सुमन ने खाई थी, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। दस माह में ही सुमन की जीवन लीला खत्म हो गई।
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