गोस्वामी तुलसीदास ने कविता नहीं मंत्र लिखे
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। कथावाचक मोरारी बापू ने रामकथा के छठे दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं को रामकथा का रसपान कराते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने कविता नहीं मंत्र लिखे हैं। वहीं सूरदासजी ने कविताएं लिखीं हैं।
कथा वाचक ने रीतिकालीन के कवि केशवदास की रचना सूर सूर तुलसी शशि उड्ग्न केशवदास, अब के कवि खद्योत सम जहं-तहं करत प्रकाश से व्याख्या की। बापू ने कहा कि सूर सूर्य है, तुलसी शशि यानि चंद्रमा हैं और केशवदास जुगनू के समान है। सूर और तुलसी दोनों ही सगुणोपासक कवि हैं। दोनों के ईष्ट देव साकार भगवान है, किंतु रूप भिन्न हैं। दोनों पहले भक्त थे कवि उसके बाद हुए। गोस्वामी तुलसीदास की बहुमुखी प्रतिभा आश्चर्यान्वित कर देती है तो दूसरी ओर सूरदास जी की बेजोड़ एकमुखी प्रतिभा मंत्रमुग्ध किए बिना नहीं रहती है। दोनों के काव्य हिंदी साहित्य कोष के अमूल्य रत्न हैं। फिर भी इन दोनों को लेकर हिंदी जगत में विवाद है। विवाद को समाप्त करते हुए बापू ने कहा कि तुलसी ने मंत्र लिखा जबकि सूर ने कविता लिखी।