पडरौना। मेडिकल कॉलेज इन दिनों बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से शुरू किए गए मेडिकल कॉलेज में आज इलाज से लेकर आधारभूत सुविधाओं तक का संकट गहराता जा रहा है। यहां पढ़ाई कर रहे मेडिकल छात्रों को भी आवास सहित कई मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत के बाद डीएम ने जांच कराई तो करीब छह माह से समस्याओं से जूझ रहे छात्रों की पीड़ा सामने आई। प्राचार्य डॉ. केपी गोंड़ का दावा है कि बिजली और पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करा दी गई है, जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पर्याप्त संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। कई आवश्यक व्यवस्थाएं अब भी अधूरी हैं। इससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल में सीमित संसाधनों के बीच चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों पर भी अतिरिक्त दबाव है। दूसरी ओर, मेडिकल छात्रों की मुश्किलें भी लगातार बढ़ रही हैं। छात्रावास और अन्य आवश्यक सुविधाओं के अभाव में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि आवास और बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं होने से पढ़ाई और प्रशिक्षण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के भवन की फिनिशिंग अधूरी होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हरका में रहने वाले छात्रों को सर्वाधिक परेशानियां हो रही हैं। अधूरे इंतजामों के बीच संस्थान का संचालन होने से मरीजों, छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही है। डीएम की जांच के बाद शासन तक मामला पहुंचने के बाद जिम्मेदार हरकत में आ गए हैं।
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मेडिकल कॉलेज में जो भी सामने कमियां आ रही हैं। उसे ठीक कराया जा रहा है। मरीजों को बेहतर इलाज और छात्रों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाया जा रहा है। कार्यदायी संस्था और विभागाध्यक्ष के साथ मीटिंग कर इलाज की सुविधा और अव्यवस्था को बेहतर किया जाएगा। डा. केपी गोंड़,प्राचार्य मेडिकल कॉलेज कुशीनगर