रिश्वत कांड में फंसेगी कई लोगों की गर्दन
खड्डा। कोटेदारों के राशन की ढुलाई के डेढ़ करोड़ रुपये का बकाया देने के बदले रिश्वत लेने के मामले में कई लोग फंस सकते हैं। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद सीओ खड्डा ने विवेचना शुरू कर दी है। कोटेदारों से वसूली करने वाले गिरोह में कुछ कोटेदार और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं।
एसएमआई गोदाम से कोटेदार के गोदाम तक अनाज पहुंचाने के लिए 70 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भाड़ा तय किया गया है। वर्ष 2001 से लेकर 2022 में पिछले माह तक कोटेदार अपनी जेब से ही किराया का भुगतान करते रहे हैं। कोटेदार संगठन की मांग पर सरकार ने वर्ष 2001 से वर्ष 2014 तक बकाया भुगतान के लिए बजट जारी कर दिया। बकाया भुगतान के मामले में करीब 40 लाख रुपये के गबन की शिकायत पर जांच हुई। इस मामले में एसएमआई सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
इस बारे में खड्डा के एसओ धनवीर सिंह ने बताया कि एसएमआई सहित छह लोगों के विरुद्ध भ्रष्टाचार की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले की जांच सीओ कर रहे हैं। इस प्रकरण में एसडीएम की जांच रिपोर्ट को मुकदमे का आधार बनाया गया है।
ऐसे हुआ गबन, मामले की जांच में खुली पोल
प्रभारी जिला विपणन अधिकारी की तहरीर पर एसएमआई पवन पांडेय, कोटेदार जयप्रकाश, मनोज रौनियार, विजय गुप्ता, प्रदीप कुमार, मनोज कुशवाहा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया। तहरीर के अनुसार, बकाया भाड़ा की रकम दिलाने के नाम सादे चेक पर हस्ताक्षर बनवाए गए। साथ ही इसके बदले में नकद धनराशि भी ली गई। इस मामले में डीएम के आदेश पर एसडीएम उपमा पांडेय ने जांच की तो मामला सही पाया गया। यह सामने आया कि कई लोगों ने सादे चेक के जरिए भुगतान लिया है। इसके बाद ही मुकदमा दर्ज कराया गया।
चर्चा में खड्डा विपणन कार्यालय
वर्ष 2020 के कोरोना काल में खड्डा विपणन गोदाम से कालाबाजारी के लिए भेजे जा रहे राशन को जब्त किया गया था। डीएम के निर्देश पर तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कसया के नेतृत्व में पांच सदस्यों की टीम ने जांच की तो तत्कालीन एसएमआई और कुछ अन्य को दोषी पाया गया। डीएम के आदेश पर कालाबाजारी करने वालों पर मुकदमा दर्ज करके उनको जेल भेजा गया था।