रामकोला थाना क्षेत्र के पगार मुरली छपरा गांव के सामने छोटी गंडक के किनारे बेरोक टोक बालू खनन हो रहा है।
यह स्थान कुशीनगर जिले में है, लेकिन बालू खनन करने वाले महराजगंज के नाविक कोटिया घाट के नाम पर हुए पट्टे का इस्तेमाल कर नदी के किनारे स्थित खेतों में खनन कर रहे हैं। अपना खेत कटते देख किसान तहसील के अधिकारियों से कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई असर नहीं हो रहा है।
तकरीबन चार महीने पूर्व ही महराजगंज जिले के बालूघाटों के नाम पर खनन करने वाले लोगों और पगार मिश्रौली गांव के लोगों के बीच मारपीट हुई थी। महराजगंज के कुछ लोगों ने गांव में आकर मारपीट की थी और एक व्यक्ति को जबरन उठा ले गए थे और उसकी निर्ममता से पिटाई की थी। उस समय पुलिस और तहसील प्रशासन सक्रिय हुआ था और कुछ दिनों के लिए अवैध बालू खनन में कमी आई थी। लेकिन तहसील प्रशासन की तरफ से ध्यान न देने के कारण बालू माफिया फिर सक्रिय हो गए हैं।
अब महराजगंज जिले के घुघली थाना क्षेत्र अंतर्गत कोटिया गांव के बालू घाट के नाम पर कुशीनगर के पगार मुरली छपरा गांव की सीमा में छोटी गंडक में बालू खनन हो रहा है। नदी उस पार के नाविक इस गांव के किसानों के खेतों से भी बालू निकाल रहे हैं। इससे किसानों के खेत कटते जा रहे हैं।
गांव के किसान जगदीश साहनी, अजीत साहनी, जनार्दन, रामधनी आदि ने बताया कि कोटिया में चार एकड़ का पट्टा है लेकिन 15 एकड़ में खनन किया जा रहा है। वह भी नदी से बालू तो निकाला ही जा रहा है, नदी के किनारे स्थित किसानों के खेतों में भी खनन हो रहा है। वह घाट महराजगंज जिले में होने के कारण कोई अधिकारी बात भी नहीं सुन रहा है।
इस संबंध में एसडीएम कप्तानगंज सचिन सिंह का कहना है कि महराजगंज जिले के ठेकेदार अपनी सीमा में ही बालू खनन कराएंगे। यदि इस तहसील क्षेत्र की सीमा में बालू खनन होते पाया गया तो मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जल्द ही छापा मारा जाएगा।