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कुशीनगर साधना, संयम व भक्ति की धरती : आचार्य प्रमोद कृष्णम

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संवाददाताओं से वार्ता करते कल्कि पीठाधीश्वर प्रमोद कृष्णम। - फोटो : KUSHINAGAR
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कुशीनगर साधना, संयम व भक्ति की धरती : आचार्य प्रमोद कृष्णम
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कसया (कुशीनगर)। कुशीनगर भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली है। यह साधना, संयम व भक्ति की धरती हैढ्ढ यहां आकर अभीभूत हूं। यह मेरा परम सौभाग्य है कि मैं यहां आया हूं। पूर्वांचल के लोग प्रेमी, निर्मल स्वभाव और भावुक प्रवृति के हैं। पुराणों में यह उल्लेख है कि भगवान का 10वां अवतार कल्कि के रूप में संभल में होगा। भगवान बुद्ध को शास्त्रों में विष्णु का नवां अवतार माना गया है। यह मेरी विशेष यात्रा है, क्योंकि संभल से भगवान विष्णु के नौंवे अवतार बुद्ध महापरिनिर्वाण स्थल पर आया हूं।
ये बातें रविवार को कल्कि धाम के पीठाधीश्वर व आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान कुशीनगर में कहीं। वह कुशीनगर महोत्सव-2020 के आयोजन में शामिल होने कुशीनगर आए थे। उन्होंने कहा कि देश में पूरी तरह से अराजकता का माहौल है। जनता का भविष्य अंधकार में है। सरकारी संस्थान बेचे जा रहे हैं। देश की कुल आबादी के 75 फीसदी में किसान हैं। उनकी जो वर्तमान में दुर्दशा है, वह बहुत भयावह व दुर्भाग्यपूर्ण है।
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उन्होंने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जनता ने प्रचंड बहुमत से सरकार चुनी, पर राजनीतिक हालात विचित्र हैं। अगर कोई सही मुद्दा उठाता है तो उसे देशद्रोही, हिंदू विरोधी व गद्दार कहा जाता है। राजनीतिक वातावरण पूरी तरह दूषित हो चुका है।
प्रदेेेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के बदलने के सवाल पर कहा कि मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि परिवर्तन संसार का नियम है। इससे किसी को घबराना नहीं चाहिए। कहा कि जो कल था, वह आज नहीं है और जो आज है, वह कल नहीं होगा। यह सतत प्रक्रिया है। जहां तक राष्ट्रीय महासचिव व प्रभारी उत्तर प्रदेश प्रियंका गांधी वाड्रा के सलाहकार होने के चलते यह कहना चाहता हूं कि नरेंद्र मोदी देश के वर्तमान हैं, तो प्रियंका गांधी देश की भविष्य हैं।
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सरकार के कृषि कानून पर तंज कसते हुए आचार्य ने कहा कि सरकार इस कानून को किसानों के लिए हितसंबद्ध बता रही है, लेकिन वह इसे बर्बादी का फरमान मान रहे हैं। यह उसी तरह है, जैसे कोई मरीज दर्द से दवा के लिए कराह रहा हो और चिकित्सक कहे कि तुम ठीक हो दवा की कोई जरूरत नहीं है। कहा कि सरकार को हठ छोड़कर किसानों के शर्तों को पूरा करना चाहिए। विडंबना है कि देश का किसान दिल्ली की दहलीज पर दम तोड़ रहा है। इस आंदोलन में 22 किसानों की जान जा चुकी है। अब सरकार इस प्रयास में जुटी है कि किसान समझ जाए। लेकिन किसान समझने को तैयार नहीं हैं। इसका मतलब यह है कि किसानों का सरकार पर भरोसा नहीं है। देश में हो रहे दुष्कर्म के मामलों पर आचार्य कृष्णन ने कहा कि मानसिक विकृति से ही व्यक्ति ऐसे रास्ते को चुनता है। कानून से दुष्कर्म की घटनाओं को नहीं रोका जा सकता है।
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