संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। घरों में पाले गए जर्मन शेफर्ड, रोटवेइलर और पुटबिल का खौफ लोगों के दिलों में बैठा हुआ है। मगर इनसे ज्यादा खतरनाक गली के कुत्ते हैं। इनका वैक्सीनेशन नहीं होता है और यह आपके दरवाजे के इर्द-गिर्द ही मंडराते हैं। अगर काट लिए तो जान पर बन सकती है।
मेडिकल कॉलेज में हर रोज लगने वाले 75 से 80 एंटी रैबीज का इंजेक्शन भी इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि गली के कुत्ते किस कदर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इसमें भी 30 फीसदी बच्चे हैं। इन्हें न तो मारिए-पीटिए और न भगाइए। बस जरूरत है, इन्हें एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने की।
लोगों का कहना है कि देसी कुत्तों को पकड़कर जंगल में छोड़ने के लिए नगर पालिका प्रशासन को इंतजाम करना चाहिए और नगर पालिका के बजट से इनका वैक्सीनेशन करा दें तो सभी सुरक्षित रहेंगे। गली के कुत्तों के आतंक से आम से लेकर खास सभी वर्ग के लोग परेशान हैं, लेकिन इनसे बचने का इंतजाम किसी के पास नहीं है।
जबकि यह मुसीबत हर दरवाजे पर खड़ी है। इसका शिकार कब कौन हो जाए, किसी को भी नहीं पता। मेडिकल कॉलेज में हर दिन लगने वाले 80 से अधिक एंटी रैबीज इंजेक्शन भी इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि गली के कुत्ते किस कदर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इसमें भी 30 फीसदी बच्चे हैं। इसे लेकर कुछ शिकायतें नगर पालिका प्रशासन तक पहुंचीं भी, लेकिन मामला गली के कुत्तों का देख इसे नजरअंदाज कर दिया गया।
हर गली, काॅलोनी में कुत्तों का झुंड रात-दिन घूम रहा है। हालात ऐसे हैं कि रात में अगर कोई मोहल्ले में पैदल या मोटरसाइकिल लेकर चला जाए तो ये कुत्ते दौड़ा ले रहे हैं। कई बार बाइक सवार कुत्तों से पीछा छुड़ाने के लिए स्पीड तेज करते हैं तो वे अनियंत्रित होकर गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं।
कुछ मोहल्ले ऐसी भी हैं, जहां लोग डर के मारे अपने बच्चों को शाम के वक्त निकलने से भी मना कर देते हैं। कुशीनगर नगर पालिका अमीय नगर में पांच वर्षीय अनिक पर कुत्तों के झुंड ने जिस तरह हमला किया, इससे अन्य मोहल्ले के लोग सहम गए हैं और बच्चों को घर से अकेले नहीं निकलने दे रहे हैं। शक्ति नगर में दीपू नामक लड़के को कुत्तों ने काट लिया था।
वहीं कुशीनगर नगर पालिका के सपहा रोड मथौली मोड पर लोग शाम होते ही आने-जाने में काफी कतराते हैं। वहां कुत्तों का समूह हमेशा रहता है। पैदल चलना तो दूर की बात बाइक और चार पहिया वाहनों को दौड़ने लगते हैं।