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Kushinagar News: प्रधान की ‘चिट्ठी’ तस्कराें का पास, टहलाते बिहार पहुंचा रहे गोवंश

Fri, 11 Jul 2025 12:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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कुशीनगर। तस्करी का ट्रेंड वक्त के साथ बदलता है। इसमें मौसम और पुलिस की चौकसी से भी तस्कर अपना रूट और तौर तरीका बदल दे रहे हैं। एक बार फिर तस्करों ने तरीका बदल लिया है। पशु को बिहार पहुंचाने के लिए पशु तस्कर लेटर पैड का सहारा ले रहे हैं, जिससे जांच होने पर जनप्रतिनिधि का पत्र होने से उनका बचाव हो जा रहा है।
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इधर, पश्चिम चंपारण से जुड़े खड्डा, दुदही, बांसी क्षेत्र से पशुओं को तस्कर चरवाहे के तौर पर टहलते-टहलते हुए बिहार में दाखिल करा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पुलिस इस ट्रेंड पर ध्यान नहीं दे रही है, जिससे तस्कर आसानी से अपने मंसूबे में कामयाब हो रहे हैं। हनुमानगंज थाने में एक ग्राम प्रधान ने लेटर पैड का दुरुपयोग कर गोवंश तस्करी में इसका इस्तेमाल करने के आरोप में केस दर्ज कराया है।
जिले के रास्ते पशु तस्करी के तौर तरीकों में बदलाव हुआ है। तस्कर पुलिस की आंख में धूल झोंकने के लिए तस्करी की अवैध धंधे को वैध दिखाने के लिए एक प्रपत्र रख रहे हैं। इस पर प्रधान के लेटर पैड पर वैध होने की पुष्टि हो जा रही है। प्रधान के लेटर पैड की आड़ में तस्कर पशुओं को खेप को न केवल बिहार के इलाकों में भेजी जा रही है, बल्कि पशुओं की खेप को तस्कर इस तरीके से वैध करने में भी जुटे है। हनुमानगंज क्षेत्र में बीते दिनाें ऐसे तरीकों का खुलासा हुआ है। इस मामले में केस भी दर्ज हुआ है।
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सूत्रों की मानें तो बैलों को महराजगंज सहित अन्य जनपदों से खरीदकर खेती कार्य के बहाने लाया जाता है। इसके बाद बैलगाड़ी में जोड़ दिया जाता है। उस पर हल या अन्य कृषि यंत्र की मदद से बिहार सीमा में श्रीपत नगर सहित अन्य स्थान पर बिहार के तस्करों को बैलगाड़ी सामान सहित सौंप दिया जाता है। यहां से पैसा लेकर तस्कर घर चले आते हैं।
बिहार के तस्कर बैलों को गाड़ी से हटा कर बांध लेते हैं और नदी के रास्ते नाव से या अन्य तरीके से बिहार के बगहा क्षेत्र में पहुंचा देते है और यहां से दूसरे प्रांत भेज दिया जाता है। बाद में खाली बैलगाड़ी को ट्रैक्टर में जोड़कर बोधी छपरा आदि गांव में पहुंचा दिया जाता है। फिर इस बैलगाड़ी का प्रयोग करते हुए दूसरे बैलों को जोड़कर इसी प्रक्रिया से वजह पहुंचाया जाता है।
सूत्रों की मानें तो अबतक करीब 200 से ज्यादा बैल तस्करी करके बिहार भेजे जा चुके हैं। बाहर से बैलों को 30 से 35 हजार या इससे कम दाम में खरीदकर लाते हैं और तस्करों से 60 से 70 हजार में बेचकर अधिक मुनाफा कमाते हैं। यह तरीका इतना सुरक्षित है कि किसी को शक नहीं हो पाता हैं कि किसान बनकर पशु तस्कर जा रहे हैं।
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