हर समस्या का समाधान संवाद से निकले : मोरारी बापू
कबीर के राम और तुलसी के राम में कोई अंतर नहीं है
अमर उजाला ब्यूरो
कसया (कुशीनगर)। हर समस्या का समाधान संवाद से ही निकलेगा, चाहे वह किसानों का आंदोलन हो या कोई और। उम्मीद है कि इस समस्या का समाधान भी बातचीत से ही निकलेगा। भगवान श्रीराम पूरी दुनिया के लिए आस्था का विषय हैं। कबीर के राम और तुलसी के राम में कोई अंतर नहीं है। कोई सगुण उपासक है तो कोई निर्गुण।
ये बातें विख्यात कथा वाचक मोरारी बापू ने शुक्रवार की शाम को पत्रकारों से बातचीत में कहीं। किसान आंदोलन के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि हर समस्या का समाधान संवाद से ही निकलेगा। जहां संवाद नहीं होगा वहां विवाद होगा। धर्म और गृहस्थ जीवन से संबंधित सवाल पर कहा कि गृहस्थ जीवन सर्वश्रेष्ठ है। अवतारी देवताओं और बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों ने भी गृहस्थ जीवन को जीया है। राजनीति में धर्म के बढ़ते प्रभाव के सवाल पर कहा, राजनीति पर धर्म का का प्रभाव कहना उचित नहीं होगा। धर्म सर्वश्रेष्ठ है जिसकी छत्रछाया में राजनीति चलती है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद मथुरा-काशी का नंबर कब तक आएगा के सवाल पर मोरारी बापू ने कहा कि यह नियति की मर्जी है। सब कुछ नियति के आधार पर ही होता है। राम का मंदिर निर्माण देश व समाज के लिए शुभ है।
समाज में बढ़ते अनाचार के सवाल पर बापू ने स्वामी विवेकानंद का एक दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि मरीज बढ़ रहे हैं तो अस्पताल बढ़ना भी जरूरी है। अस्पताल रहने पर ही मरीजों का इलाज संभव है। नदियों में बढ़ते प्रदूषण के सवाल पर कथावाचक ने कहा कि प्रत्येक नदी जीवित तीर्थ है। इसको स्वच्छ रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार ने काफी प्रयास किया है। परंतु यह केवल सरकारी काम नहीं है, प्रत्येक व्यक्ति को इसके लिए नैतिक रूप से जिम्मेदार बनना होगा। लॉकडाउन का उदाहरण रखते हुए बापू ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान चंडीगढ़ से हिमालय दिखने लगा। यह प्रदूषण कम होने के कारण संभव हो सका। अगर प्रकृति का दोहन कम किया जाए और प्रदूषण घटे तो यह मानवता के लिए बेहतर होगा।
संस्कृत स्कूलों से संबंधित सवाल पर बापू ने कहा कि संस्कृत भाषा की सेवा होनी चाहिए। धर्मांतरण के सवाल पर भी मोरारी बापू ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार पूजा की छूट होनी ही चाहिए, भय या प्रलोभन वश किसी भी धर्म के लोगों का धर्मांतरण गलत है।
एक अन्य सवाल के जवाब में कथा व्यास ने कहा कि कबीर के राम व तुलसी के राम एक ही हैं। कोई राम की सगुण रूप में पूजा करता है तो कोई निर्गुण रूप में। एक जगह तो कबीर भी कहते हैं कि वे राम की दुल्हनिया बनेंगे, मतलब साफ है कि वे भी किसी न किसी रूप में राम को साकार ब्रह्म ही मानते हैं। तुलसी के राम से गांधी के हे राम तक की यात्रा के सवाल पर कहा कि हर शब्द की अपनी महिमा है।