पडरौना। प्रदेश में 2024 की रिपोर्ट में दुर्घटना बहुल 20 जिलाें में कुशीनगर भी शामिल हैं। यहां ट्रैफिक नियमों की अनदेखी से तीन माह में 89 लोगों ने जान गवां दी है। हादसे की वजह पर गौर करें तो सबसे ज्यादा मौतें सिर पर चोट लगने से हुई है। बिना हेलमेट, गलत दिशा में वाहन चलाने, ट्रिपलिंग, नशे, ओवरलोडिंग आदि लापरवाही से लोगों की जान गई है। कई ऐसे हादसे भी हुए जिसमें घायलों को लंबे समय तक शारीरिक समस्याओं से जूझना पड़ा है।
जिले में सड़क हादसों की संख्या बढ़ रही है। पूर्वांचल में गोरखपुर के बाद कुशीनगर ऐसा जिला है, जिन्हें उन 20 जिलों की सूची में शामिल किया गया है, जहां प्रदेश में 2024 में सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं। रविवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में भी इस पर चिंता भी जताई। ऐसे में सर्वाधिक हादसों का कारण बनने वाले ब्लैक स्पाॅट के साथ सड़क सुरक्षा सुधारने का दावा करने वाले लोक निर्माण विभाग, यातायात और परिवहन विभाग के दावे सवालों में घेरे में है।
तीन माह में 89 ऐसे लोग काल के गाल में समा चुके हैं, जिन्होंने हेलमेट नहीं लगाए थे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में चोट लगने से ही मौत होने की पुष्टि हुई है। इन सभी दुर्घटनाओं की लापरवाही देखें तो बाइक पर ट्रिपलिंग, नशे में गाड़ी चलाना, कान में इयरफोन, रफ्तार, टेंपो सवारियों और ट्रक चालकों के साथ दो पहिया वाहनों की घोर लापरवाही सामने आई है।
जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग 28 के फाजिलनगर बाघौच मोड़, पटहेरवा थाना क्षेत्र में लबनिया, महुअवा कांटा, पटहेरिया, हाटा कोतवाली क्षेत्र में ढाढ़ा, सुकरौली बाजार इसके अलावा मुख्य जिला मार्ग कसया सेवरही, पडरौना कसया, बनरहा तमकुही राज आदि सड़कों पर भी ज्यादा हादसे हुए। इनमें कुछ जिले के ब्लैक स्पॉट में शामिल हैं तो कुछ ब्लैक स्पॉट बनने के मानकों को भी पूर्ति करते हैं। तीन माह में दस लोगों की मौतें इन सड़कों पर हुई हैं, लेकिन यातायात और परिवहन विभाग ने अब तक इन्हें ब्लैक स्पॉट नहीं बनाया। इसकी वजह से यहां सड़क सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त नहीं हुए।