जिउतिया की खरीदारी करतीं महिलाएं। संवाद
पडरौना। जीवित्पुत्रिका (जितिया) रविवार को मनाई जाएगी। आश्विन कृष्ण अष्टमी के प्रदोषकाल में पुत्रवती महिलाएं जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। इसमें पुत्रवती महिलाएं निर्जला उपवास रहकर जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। महिलाएं इसकी तैयारी में जुटी हैं। शुक्रवार की देर शाम तक महिलाएं ब्रती सामान आदि की खरीदारी कीं, जिससे बाजार में चहल पहल रही।
मान्यता है कि कैलाश पर्वत पर भगवान शकर माता पार्वती को कथा सुनाते हुए कहते हैं कि आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन उपवास रखकर जो स्त्री सायं प्रदोषकाल में जीमूतवाहन की पूजा करती हैं और कथा सुनने के बाद आचार्य को दक्षिणा देती है, वह पुत्र-पौत्रों का पूर्ण सुख प्राप्त करती है।
व्रत का पारण दूसरे दिन अष्टमी तिथि की समाप्ति के बाद किया जाता है। यह व्रत अत्यंत फलदायी है। जितिया व्रत हर साल आश्विन महीने के कृष्णपक्ष अष्टमी को मनाया जाता है। पंडित हरिओम मिश्र ने बताया कि इस बार आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 14 सितंबर की सुबह आठ बजकर 14 मिनट पर प्रारंभ होगा। 15 सितंबर की सुबह 6:44 मिनट तक रहेगा। इसी दिन जिउतिया पर्व मनाया जाएगा। व्रत से एक दिन पहले सप्तमी 13 सितंबर की रात महिलाएं नहाय-खाए करेंगी। उन्होंने बताया कि सनातन धर्मावलंबियों में इस व्रत का खास महत्व है। वंश वृद्धि व संतान की लंबी आयु के लिए महिलाएं जिउतिया का निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन माताएं अपनी सन्तानों की सुरक्षा व स्वास्थ्य के लिए पूरे दिन, पूरी रात 24 घंटे का निर्जला उपवास करती हैं। इसे पुत्र की लंबी आयु के लिए किया जाता है।