पडरौना/खड्डा। पडरौना निवासी सतीश और बिहार की रहने वाली जानकी का जीवन सांपों और इंसानों के बीच संतुलन कायम करने में बीत रहा है। डर नहीं संरक्षण का संदेश देते हुए दोनों वन्यजीवों को सुरक्षित ठिकाना दिलाने में जुटे हैं।
वाल्मीकिनगर की ‘स्नेक लेडी’ के नाम से पहचानी जाने वाली जानकी देवी जहरीले सांपों का रेस्क्यू कर न केवल लोगों की जान बचाती हैं बल्कि सापों को भी सुरक्षित जीवन देती हैं। वहीं पडरौना क्षेत्र के सुशील वन्य जीवों को अपना दोस्त मानते हैं। पडरौना के गुलेलहां निवासी सुशील मिश्रा एक समर्पित वन्यजीव रेस्क्यूअर एवं संरक्षण कार्यकर्ता के रूप में वर्षों से सांपों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के सुरक्षित रेस्क्यू और संरक्षण के लिए कार्य कर चुके हैं। उनका उद्देश्य वन्यजीवों को नुकसान से बचाना, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और समाज में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता पैदा करना है। सुशील अब तक करीब 15,000 सांपों का रेस्क्यू कर चुके हैं।
इसके अलावा 200 से अधिक विभिन्न प्रजाति के पक्षियों और 100 से अधिक बंदरों को रेस्क्यू कर उन्हें जंंगल में सुरक्षित पहुंचा चुके हैं। वहीं खतरनाक एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में करीब 50 नीलगाय और दो तेंदुओं काे रेस्क्यू कर जंगल की राह दिखा चुके हैं।
वहीं कुशीनगर से सटे बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र के बिसही गांव के गाछी टोला निवासी जानकी देवी का जीवन संघर्ष और साहस की मिसाल है। करीब चार दशक से अधिक समय से वह सांपों के रेस्क्यू का काम कर रही हैं। महज 12 वर्ष की उम्र से शुरू हुआ यह सिलसिला आज भी जारी है। उन्होंने सांप को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ देती हैं। हाल ही में बिसही गांव में एक घर से करीब 10 फीट लंबे किंग कोबरा के रेस्क्यू के दौरान जानकी देवी खुद उसके दंश का शिकार हो गई थीं।