पडरौना। उच्च न्यायालय के आदेश और जिलाधिकारी के रिसीवरशिप के बावजूद पडरौना स्टेट की कानूनी दांवपेंच में फंसी जमीनों की धड़ल्ले से हो रहे खरीद फरोख्त मामले में उच्च न्यायालय ने दाखिल किए गए अवमानना वाद पर मंगलवार को सुनवाई की। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए विपक्षी को अपना प्रति शपथ पत्र दाखिल करने के लिए अगले तीन हफ्ते के समय निर्धारित किया है।
बता दें कि रानी रेवती देवी रवि प्रताप न्यास की मुख्य ट्रस्टी डा. मधु दीक्षित की तरफ से दाखिल इस मुकदमे में आदित्य प्रताप नारायण सिंह सहित कुल 195 लोगों को शामिल किया गया है। पडरौना राज दरबार की जमीनों का बड़ा हिस्सा कुशीनगर जिले के कई तहसील क्षेत्रों में फैला हुआ है। खासकर पडरौना और खड्डा तहसील क्षेत्र में राजदरबार की जमीनों पर सीलिंग से जुड़े मुकदमे के बीच चकबंदी विभाग पर इन जमीनों पर मनमाने तरीके से नियम विपरीत दूसरे लोगों का नाम चढ़ाने का आरोप लगता रहा है।
मामले में पडरौना राज दरबार से जुड़ा एक पक्ष रानी रेवती देवी रवि प्रताप न्यास (ट्रस्ट) अपने हक की जमीनों के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़ता चला आ रहा है। इस मामले में वादी व प्रतिवादियों के बीच चल रहे कानूनी लड़ाई पर न्यायालय ने अपने कई आदेश जारी करते हुए दोनों पक्षों को जमीनों के खरीद बिक्री पर रोक के स्पष्ट आदेश दे रखे हैं। न्यायालय के आदेश पर ही जिलाधिकारी कुशीनगर को बतौर रिसीवर नियुक्त करते हुए जमीनों की देखरेख का जिम्मा भी सौंपा गया है लेकिन इन सब के बाद भी उक्त जमीनों की बिक्री का काम खुलेआम धड़ल्ले से किया जा रहा था। ट्रस्ट की तरफ से अवमानना वाद दाखिल करने वाले उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित कुमार ने बताया कि रानी रेवती देवी रवि प्रताप न्यास की मुख्य ट्रस्टी डा. मधु दीक्षित की तरफ से दाखिल अवमानना आवेदन (सिविल) संख्या 7473/2025 डॉ. मधु दीक्षित बनाम आदित्य प्रताप नारायण सिंह एवं 195 अन्य की सुनवाई न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष आज हुई।
पक्ष और विपक्ष को सुनने के बाद न्यायालय ने उपस्थित विपक्षी पक्षकार को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय प्रदान किया और साथ ही यह भी आदेश दिया कि यदि आवेदक की ओर से कोई प्रत्युत्तर शपथ पत्र दाखिल किया जाना हो, तो वह काउंटर एफिडेविट दाखिल होने के एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किया जा सकता है।