उस गुल्लक में सिर्फ नोट और सिक्के नहीं थे। उसमें सात साल के मासूम के सपने थे जो एक, दो, दस तो कभी पचास या सौ रुपये की किस्तों में जमा हो रहे थे। नेपाल का दर्द देखकर मासूम ने जो कुछ भी अपने गुल्लक में जुटाया था वह बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी को सौंप दिया। विशुनपुरा ब्लॉक क्षेत्र के बेतिया गांव निवासी इमरान अली सिद्दीकी के बेटे अल्फाज शेख ने बृहस्पतिवार को जब अपना गुल्लक डीएम को सौंपा तो वह भी उसकी पहल पर भावुक हो गए और पीठ थपथपाकर शाबाशी दी। बेटे के इस फैसले ने पिता को भी गर्व से भर दिया।
इमरान ने बताया कि टीवी और सोशल मीडिया पर इन दिनों नेपाल की दर्दनाक तस्वीरें ही दिख रही हैं। सभी इससे मर्माहत हैं। अल्फाज ने भी उसे देखा। उन तस्वीरों और वीडियो में पानी में समाते घर, बेघर होते और जिंदगी की जद्दोजहद करते लोगों को देखा तो उसका मासूम मन विचलित हो गया। उसके मन में उन लोगों की मदद की इच्छा जागी।
उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए बृहस्पतिवार को इमरान बेटे को लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे। अल्फाज के नन्हे हाथों में उसके सपनों की पूंजी थी। उसने डीएम महेंद्र सिंह तंवर को प्रार्थना पत्र देकर अपनी इच्छा बताई। उसने अनुरोध किया कि उसकी गुल्लक में जमा राशि को जिला प्रशासन के माध्यम से नेपाल के प्रभावितों तक पहुंचा दिया जाए। बच्चे की इस पहल ने न सिर्फ डीएम बल्कि वहां मौजूद सभी को भावुक कर दिया।
अल्फाज शेख जब गुल्लक लेकर कार्यालय आया तो कुछ समझ नहीं पाया। उसके पिता ने जब बताया कि सोशल मीडिया पर नेपाल की त्रासदी के वीडियो-फोटो देखकर उनका बेटा आहत है। वह वहां के लोगों की मदद के लिए गुल्लक में रखी रकम देना चाहता है। सात साल के बच्चे में लोगों की पीड़ा के प्रति यह भाव देखकर बेहद प्रसन्नता हुई। इससे लोगों को प्रेरणा मिलेगी। बच्चे द्वारा दी गई रकम नेपाल सरकार को मदद के लिए भेजी जाएगी।
-महेंद्र सिंह तंवर, डीएम, कुशीनगर