डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों की बढ़ीं मुश्किलें
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर बंद रही निजी अस्पतालों की ओपीडी
पडरौना। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर बुधवार को निजी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। ओपीडी बंद होने से मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई। जिले के दूर दराज से इलाज कराने आए तीमारदार मरीजों को लेकर दिन भर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे। इससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई। हालांकि चिकित्सकों ने इमरजेंसी मरीजों का इलाज किया। इससे तीमारदारों ने राहत की सांस ली।
हड़ताल कर रहे संगठन के अध्यक्ष डॉ. केदारनाथ सिंह, डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी, डॉ. वीके सिंह, डॉ. द्वारिका प्रसाद, डॉ. वीपी बिहारी चौबे, डॉ. संदीप अरुण श्रीवास्तव, डॉ. दिव्य शुक्ला, डॉ. यशा मिश्र, डॉ. शैल सिंह, डॉ. सीपी गुप्ता, डॉ. राजीव मिश्र, डॉ. केपी गौंड, डॉ. अजय कुमार शुक्ल, डॉ. रामायन सिंह, डॉ. सुरभि श्रीवास्तव आदि चिकित्सकों ने नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल 2019 इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के निर्देश पर बुधवार को निजी अस्पतालों के चिकित्सक ओपीडी बंद कर हड़ताल पर रहे। चिकित्सकों का कहना था कि लोकसभा में अलोकतांत्रिक नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल पास कर देश की स्वास्थ्य सेवाएं अंधकार में धकेला जा रहा है। इस बिल के माध्यम से गैर प्रशिक्षित व्यक्तियों को आधुनिक चिकित्सा पद्घति में कार्य करने की इजाजत देकर अयोग्य लोगों को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा मेडिकल छात्रों के परीक्षा पद्धति में छेड़छाड़ कर आने वाली पीढ़ी के भविष्य एवं देश के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालने का कार्य कर रही है, जो देश के किसी भी चिकित्सकों को मंजूर नहीं है।
चिकित्सकों की हड़ताल से बुधवार को चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई। इलाज के लिए जिले के दूर दराज आए मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकना पड़ा। परसौनी के विनोद कुमार गुप्ता, शकुंतला देवी, मटिहनिया के विमलेश यादव, शिवपुर बुजुर्ग के रामप्यारे आदि ने बताया कि बुधवार को शहर के सभी डॉक्टर हड़ताल पर हैं। इससे मरीजों को बीमारियों का इलाज करने के लिए परेशानी हो रही हैं। कई मरीज बिना इलाज कराए ही घर चले गए। हालांकि इमरजेंसी मरीजों को चिकित्सकों ने जांच कर उन्हें जरूरी दवाएं उपलब्ध कराईं। इससे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों ने राहत की सांस ली।