पडरौना। बुखार होने पर एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स बीच में छोड़ना टायफाइड (मियादी बुखार) का कारण बन सकता है। इस तरह के मेडिकल कॉलेज में हर दिन 20 से 25 मरीज आ रहे हैं। मरीजों को डॉक्टर दवा का कोर्स पूरा करने की सलाह दे रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि मौसम में हो रहे बदलाव से साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं। इससे होने वाला बुखार दूषित पानी और भोजन से फैलता है, जो मानसून के दौरान अधिक खतरनाक होता है।
यदि आप एंटीबायोटिक्स का कोर्स पूरा नहीं करते हैं, तो बैक्टीरिया शरीर में ही रह जाते हैं और दोबारा संक्रमण का कारण बनते हैं, जो टायफाइड का रूप ले सकता है। समय पर इलाज नहीं होने या दवा बीच में छोड़ने पर पेट में ब्लीडिंग या आंतों में छेद जैसी जानलेवा स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। यदि लगातार तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, भूख न लगना और पेट में दर्द की समस्या हो तो टायफाइड हो सकता है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में इन दिनों 200 से 250 की ओपीडी प्रतिदिन हो रही है। इसमें बुखार के करीब 40 फीसदी मरीज निकल रहे हैं, जबकि टायफाइड के 20 से 25 मरीज मिल रहे हैं। ये ऐसे मरीज हैं, जिन्हें बुखार होने पर दवा ली और आराम होने पर बीच में ही दवा छोड़ दी।