कुशीनगर। बुद्ध स्थली पर डिजिटल गाइड के बताने पर जाएंगे तो रास्ते से भटक जायेंगे। यहां शांत छाया, हाथ में चाय का कप और आसपास गूंजती मंदिर की घंटियां आत्मा को छू लेने वाला अनुभव देती हैं, लेकिन डिजिटल गाइड ऐप की एंट्री ने तस्वीर को थोड़ा जटिल बना दिया है।
बदलते समय के साथ डिजिटल गाइड ऐप और ऑडियो टूर ने पर्यटन को टेक-फ्रेंडली जरूर बनाया है, लेकिन कुशीनगर पहुंचे कई पर्यटकों के लिए यही तकनीक परेशानी का कारण बन रही है। खासकर पहली बार आने वाले पर्यटक गलत रास्तों, अधूरी जानकारी और जटिल इंटरफेस के चलते भटकते नजर आ रहे हैं। काठमांडो से परिवार के साथ पहुंचे गिरिजा बताते हैं कि होटल, हाईवे और गोरखपुर एयरपोर्ट की लोकेशन ऐप से बिल्कुल सही मिली, लेकिन जैसे ही हम बौद्ध स्थलों पर पहुंचे, ऐप का खास मदद का नहीं रहा। कई जगह रास्ते गलत बताए गए या जानकारी अधूरी थी। वहीं दिल्ली से आईं पर्यटक रीमा गुप्ता कहती हैं कि उन्हें बताया गया था कि डिजिटल गाइड ऐप के जरिए हर गली, मूर्ति और स्थल की कहानी सुनी जा सकती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि एआर फीचर्स से स्थल को 3-डी में देखा जा सकता है और स्थानीय हैंडीक्राफ्ट मार्केट या वर्कशॉप की बुकिंग भी ऐप से हो जाएगी, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं मिला। कई महत्वपूर्ण बातें तो सिर्फ स्थानीय गाइड ही जानते हैं।
पर्यटन से जुड़े जानकारों का मानना है कि डिजिटल गाइड फिलहाल बुद्ध स्थली की मूल भावना और ऐतिहासिक गहराई को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित गाइडों की संख्या भी कम है। जो गाइड उपलब्ध हैं, उनमें से कई को स्थलों के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की समुचित ट्रेनिंग नहीं मिली है। बुद्ध पीजी कॉलेज की प्रोफेसर सीमा त्रिपाठी कहती हैं कि स्थानीय पंजीकृत गाइड न केवल पर्यटक को सही मार्ग दिखाते हैं, बल्कि स्थल की ऐतिहासिक और धार्मिक कहानियां भी जीवित रखते हैं। प्रशासन ने पंजीकृत गाइडों को डिजिटल गाइड के साथ लिंक किया है, जिससे पर्यटक भ्रमित नहीं होते और अनुभव ऑथेंटिक रहता है।