पकवा इनार (कुशीनगर)। महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए करीब साढ़े पांच साल पहले प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक परियोजना शुरू नहीं हो सकी है।
यह रेल लाइन गोरखपुर से कुशीनगर होते हुए पडरौना तक 64.5 किलोमीटर लंबाई में बनाई जानी है। इस परियोजना को वर्ष 2018-19 में प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, फिर भी परियोजना शुरू नहीं हो सकी है। शनिवार को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा।
इसमें रेल बजट भी शामिल हैं। इस बजट में कुशीनगर के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। आने वाले बजट में बजट प्रावधान किया जाए तो बुद्ध स्थली को जोड़ने वाली स्वीकृत रेल परियोजना को संजीवनी मिल जाएगी।
परियोजना के लिए धन मिल जाए तो कुशीनगर रेल मार्ग से जुड़ जाएगा। कुशीनगर हवाई और सड़क मार्ग से तो जुड़ चुका है। इससे न केवल महात्मा बुद्ध का दर्शन करने के लिए आने वाले सैलानियों को सीधे पहुंचने में सहूलियत होगी, बल्कि यह जनपद मुख्यालय पडरौना और मंडल मुख्यालय गोरखपुर से रेलमार्ग से जुड़ जाएगा। कुशीनगर पहुंचने का सीधा रेलमार्ग न होने के कारण बुद्ध से संबंधित स्थलों की यात्रा पर आने वाले बहुत से सैलानी लुंबिनी और सारनाथ में दर्शन-पूजन कर लौट जाते हैं।
वर्ष 2017 में हुआ था सर्वे : गोरखपुर से कुशीनगर होते हुए पडरौना तक 64.5 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना के लिए वर्ष 2017 में सर्वे हुआ था। वर्ष 2018-19 में इसे प्रशासनिक स्वीकृति मिली। इस परियोजना की लागत 1,345 करोड़ से बढ़कर अब 1,467 करोड़ रुपये कर दी गई है। परियोजना स्वीकृत होने के बावजूद कार्य शुरू नहीं हो पा रहा।
सिर्फ सड़क मार्ग से ही आते है देश-विदेश के सैलानी : कुशीनगर तक पहुंचने का सड़क मार्ग ही माध्यम है। यात्री बसों और निजी वाहनों से यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं।