याचिका में बताया गया कि 1978 से लेकर 2006 तक पांचवें वेतन पुनरीक्षण तक, एचआरटीसी में कंडक्टर और क्लर्क दोनों के पद एक ही वेतनमान पर थे। समस्या 1 अक्तूबर 2012 से उत्पन्न हुई जब राज्य सरकार ने 27 सितंबर 2012 को एक अधिसूचना जारी कर राज्य में कुछ पदों, जिसमें क्लर्क शामिल थे, के लिए संशोधित वेतन बैंड और ग्रेड पे (10300-34800+3200 जीपी) दिया। चूंकि कंडक्टर का पद राज्य सरकार के अधीन नहीं था, यह अधिसूचना में शामिल नहीं हो सका। एचआरटीसी ने 24 अक्तूबर 2013 के अपने कार्यालय आदेश से राज्य सरकार की अधिसूचना को लागू किया, जिससे एचआरटीसी के क्लर्को को उच्च वेतनमान मिला, लेकिन कंडक्टरों को नहीं, जिससे 4 साल की अवधि के लिए विसंगति पैदा हो गई। एचआरटीसी ने स्वयं अगले सामान्य वेतन पुनरीक्षण (1 जनवरी 2016 से प्रभावी) में दोनों पदों को फिर से समान वेतनमान में रखकर इस विसंगति को दूर कर दिया।