पडरौना। खाड़ी युद्ध का असर अब धीरे धीरे दिखने लगा है, रसोई गैस सिलिंडर के बाद अब पेट्रोल-डीजल पर भी असर दिखने लगा है। तेल के अभाव में जिले के करीब दस पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं। इसकी वजह युद्ध शुरू होने के बाद नकद तेल लेने की व्यवस्था लागू कर दी गई है, जबकि पहले क्रेडिट पर तेल मिल जाता था और बेच कर डीलर रुपये देते थे।
कप्तानगंज में तीन और हाटा में दो पेट्रोल पंप ड्राई हो गए हैं। मंगलवार को डीएसओ केजी पांडेय तेल कंपनियों, गैंस कंपनियों के अलावा क्षेत्रीय पूर्ति अधिकारियों के साथ बैठक कर इसके निदान पर चर्चा की। रसोई गैस सिलिंडर बिना बुकिंग कराए आसानी से पहले मिल जाता था या बुकिंग के 21 के दिन के अंदर पहुंच जाता था, लेकिन अब बुकिंग के 25 दिन बाद गैस सिलिंडर देने का फरमान जारी हुआ है। इसको लेकर रसोई गैस एजेंसियाें पर लोगों की भीड़ जुट रही है।
जिला पूर्ति अधिकारी केजी पांडेय ने बताया कि लोग अफवाह में आकर रसोई गैस सिलिंडर के लिए परेशान हो रहे हैं, नियम में बदलाव के कारण ऐसे हो रहा है। रसोई गैस सिलिंडर की आपूर्ति हो रही है। सहालग को अफवाह को लेकर लोग रसोई गैस सिलिंडर डंप कर रहे हैं। बुकिंग कराने के बाद ओटीपी आने पर ही सिलेंडर लोगों को दिया जाएगा।
पहले 21 दिन के अंदर बुकिंग के बाद मिलता था अब 25 दिन के अंदर मिलेगा। पेट्रोल और डीजल की कोई समस्या नहीं है। पहले क्रेडिट पर तेल कंपनियां डीलरों को डीजल, पेट्रोल देती थी और बिक्री करने के बाद डीलर रुपये जमा करते थे, लेकिन अब नकद रुपये जमा करने पर ही तेल मिल रहा है।
ऐसे में जो डीलर क्रेडिट पर निर्भर थे, उनका ही पेट्रोल पंप बंद होगा, लेकिन जिले में अभी कोई ऐसी अधिकारिक सूचना नहीं मिली है। अफवाहों पर रोक लगाने और रसोई गैस की कमियों से निपटने के लिए तेल कंपनियों के जिला स्तरीय अधिकारियों और क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षकों के साथ बैठक हुई है। इसके लिए रणनीति बनाई गई है।