तमकुहीराज। कूटरचित परवाना, इंद्राज व आदेशों के आधार पर फर्जीवाड़ा गिरोह बीस दिन में सरकारी जमीनों पर लोगों के नाम दर्ज कर फर्जी खतौनी उपलब्ध करा देता था। फर्जी खतौनी तैयार करने का मास्टर माइंड टीपू सुल्तान है। गिरोह सरकारी जमीन पर नाम दर्ज कराने के एवज में प्रति एकड़ दो लाख रुपये वसूलते थे। क्षेत्र के लोग सरकारी जमीनों की गाटा संख्या व अन्य विस्तृत जानकारी गिरोह को देते थे। इसके बाद गिरोह डील के मुताबिक, फर्जीवाड़े के खेल को अंजाम देता था। इसमें चकबंदी कार्यालय के एक राजस्वकर्मी की भूमिका भी संदिग्ध मिली है।
नगर पंचायत दुदही में नवीन परती की सैकड़ों एकड़ सरकारी भूमि पर राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराने के मामले में तहसीलदार की ओर से 10 नामजद समेत 40 लोगों पर विशुनपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। सूत्रों ने बताया कि बांसगांव, बड़हरा बुजुर्ग, पड़रौन मडुरही, तुर्कवलिया साहबगंज, रामपुर बरहन और धोकरहा समेत कई गांवों के अपने करीबियों के नाम दर्ज कराए गए। इसके एवज में गिरोह ने करोड़ों रुपये ऐंठ लिए। सरकारी जमीन पर नाम दर्ज कराने के लिए प्रति एकड़ दो लाख रुपये निर्धारित किया गया था। लोग आर्थिक क्षमता के हिसाब से सरकारी जमीन पर नाम दर्ज कराते थे। तहसील प्रशासन की जांच में करीब दस एकड़ सरकारी जमीनों की कूटरचित खतौनी मिली थी, जिन पर विभिन्न लोगों के नाम दर्ज मिले।
गिरोह ने तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों व नगर पंचायतों की सरकारी जमीनों को टारगेट किया था। इलाके के लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से सरकारी जमीन का गाटा संख्या व अन्य विस्तृत जानकारी गिरोह काे उपलब्ध कराते थे। इसके बाद गिरोह फर्जीवाड़ा कर खतौनी उपलब्ध करा देरा था। फर्जी खतौनी में उपलब्ध विवरणों के आधार पर लोग संतुष्ट हो जाते रहे। इसके कारण कोई मतभेद सामने नहीं आया। गिरोह बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों पर फर्जीवाड़े के खेल को अंजाम देने में सफल रहा और तहसील प्रशासन को भनक नहीं लगी। एसडीएम कुणाल गौरव ने बताया कि शातिर तरीके से जालसाजों ने फर्जीवाड़ा किया है। जांच में सामने आ रहे एक-एक तथ्य को जोड़कर इसमें शामिल लोगों को चिह्नित किया जा रहा है।