संवाद न्यूज़ एजेंसी
तमकुहीराज। फर्जी परवाना, इंद्राज व आदेशों के आधार पर नाम दर्ज कराने के खेल के मास्टरमाइंड बांसगांव निवासी सहज जनसेवा केंद्र संचालक टीपू की तलाश तेज हो गई है। पुलिस व तहसील प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अलग-अलग बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
मजबूत पैठ व लगातार ठिकाने बदलने के कारण फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड टीपू अब तक पुलिस की गिरफ्त नहीं आया है। जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
पुलिस व राजस्व विभाग की जांच में संकेत मिले हैं कि गिरोह ने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है। गिरोह ने पांच गांवों में नवीन परती, बंजर व खलिहान की जमीन पर मालिकाना हक दर्ज कराया है। जानकारों का मानना है कि टीपू को भले ही मास्टर माइंड है लेकिन बिना जिम्मेदारों की शह के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता है।
डीएम महेंद्र सिंह तंवर से एक व्यक्ति ने नगर पंचायत दुदही स्थित नवीन परती, बंजर व खलिहान की सैकड़ों एकड़ सरकारी भूमि की खतौनी जारी करने की शिकायत की। शिकायत के बाद तहसील प्रशासन की जांच में मामला सत्य पाया गया। 19 जुलाई को तहसीलदार महेश कुमार की तहरीर पर राजकुमार शुक्ला, मुर्तुजा, शांति देवी, इंद्रकिशोर, झगरू, लीलावती, सुनीता, मदेसर, रीता, टीपू इंफार्मेशन सेंटर के संचालक टीपू सुल्तान समेत 40 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
नगर पंचायत में शामिल बांसगांव के आंशिक भाग में आराजी संख्या 401/0.308 हेक्टेयर भूमि अभिलेखों में नवीन परती, बंजर व खलिहान के रूप में दर्ज है। आरोप है कि इसी भूमि पर आकार पत्र-45 और मालिकाना रजिस्टर में नाम दर्ज करा दिए गए। फर्जीवाड़ा गिरोह ने चकबंदी अधिकारी सहित अन्य जिम्मेदारों की मुहर व हस्ताक्षर से खतौनी भी जारी कर दी। जांच के दौरान लैपटॉप की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए।
इन्फार्मेशन सेंटर संचालक टीपू सुल्तान की भूमिका मास्टरमाइंड के रूप में सामने आई। जांच में पुष्टि हुई कि गिरोह ने करोड़ों रुपये की दस एकड़ जमीन पर अलग-अलग अवधि में फर्जी तरीके से करीबियों के नाम दर्ज कराई है। तहसील में तैनात एक निजी मुंशी की भूमिका सामने आ रही है। इसकी अलावा कंप्यूटर ऑपरेटरों व तत्कालीन आरके (रजिस्ट्रार कानूनगो) की भी भूमिका संदिग्ध मिली है।
प्रशासनिक अधिकारी अलग-अलग टीमें की जांच का हवाला देकर आधिकारिक तौर पर कुछ भी बताने से अभी परहेज कर रहे हैं। एसडीएम कुणाल गौरव ने बताया कि जांच में जल्दबाजी ठीक नहीं होगी। जांच में जो बातें सामने आ रही है। उसका साक्ष्य जुटाया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद जिनका भी फर्जीवाड़े में नाम सामने आएगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।