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Kushinagar News: दो शुभ मुहूर्त में पूजा करने पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

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पडरौना। दिवाली का त्योहार रविवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व होता है। मां लक्ष्मी की पूजा कार्तिक माह के अमावस्या तिथि पर प्रदोष काल और स्थिर लग्न किया जाता है। इस बार दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजन के लिए दो शुभ मुहूर्त रहेगा। इन शुभ मुहूर्त में पूजन करने वालों पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है।
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इस बार की दिवाली बहुत ही शुभ योग में मनाई जाएगी। दिवाली पर पांच तरह के राजयोगों का निर्माण होगा। इसलिए इस बार की दिवाली बहुत ही खास रहने वाली है। दिवाली पर घरों में दीये जलाने और रोशनी करने करने का विशेष महत्व होता है। दिवाली की शाम और रात के प्रहर में मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। पंडित हरिओम मिश्र ने बताया कि पंचांग के अनुसार दिवाली का त्योहार और मां लक्ष्मी की पूजा कार्तिक माह के अमावस्या तिथि पर प्रदोष काल और स्थिर लग्न किया जाता है। इस बार दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजन के लिए दो शुभ मुहूर्त रहेगा। उन्होंने बताया कि वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार अमावस्या तिथि 12 नवंबर को दोपहर 02:44 बजे से शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन यानी 13 नवंबर को दोपहर 02:56 बजे खत्म होगी। दिवाली पर लक्ष्मी पूजा हमेशा अमावस्या तिथि के प्रदोष काल में मनाई जाती है। इस कारण से 12 नवंबर को प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश की पूजा होगी।





लक्ष्मी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

12 नवंबर को दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए दो शुभ मुहूर्त होंगे। पहला शुभ मुहूर्त शाम के समय यानी प्रदोष काल में मिलेगा, जबकि दूसरा शुभ मुहूर्त निशीथ काल में होगा। प्रदोष काल 12 नवंबर की शाम 05:11 से 07:39 बजे तक और वृषभ काल (स्थिर लग्न) शाम 05:22 बजे से 07:19 बजे तक रहेगा। इसी तरह दिवाली की रात को महालक्ष्मी पूजा के लिए निशीथ काल मुहूर्त भी अच्छा माना जाता है। निशीथ काल का मुहूर्त 11:39 बजे से रात्रि 12:30 बजे तक रहेगा। इसकी अवधि करीब 52 मिनट की होगी। इसके अलावा इस बार दिवाली पर आयुष्मान और सौभाग्य योग भी बन रहा है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सौभाग्य योग को बहुत ही शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है। इस योग में दिवाली पूजा और शुभ कार्य करने पर भाग्य में वृद्धि और सुख-समृद्धि आती है। सौभाग्य योग रविवार की शाम शाम 04:25 मिनट से 13 नवंबर की दोपहर 03:23 मिनट तक रहेगा, जबकि आयुष्मान योग रविवार की सुबह से शाम 04:25 मिनट तक रहेगा।
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दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा की खास बातें

1- दिवाली पर हमेशा ही प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा करनी चाहिए। प्रदोष काल वह समय होता है तब सूर्यास्त होता है। इसके बाद का मुहूर्त का प्रदोष काल का मुहूर्त कहलाता है।

2- दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा अकेले नहीं करनी चाहिए, बल्कि भगवान गणेश के साथ करना चाहिए। मां लक्ष्मी की अकेले पूजा करने पर पूजा का पूरा फल नहीं मिलता है। मां लक्ष्मी से भगवान गणेश की एक वरदान प्राप्त है, कि जहां पर गणेश जी पूजा होगी है। वहां पर मां लक्ष्मी स्थाई रूप से विराजमान होंगी।
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3- दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ धन के देवता कुबेर की पूजा अवश्य करें। भगवान कुबेर को धन के भंडार यानी कोषाध्यक्ष होते हैं।

4- हर साल दिवाली पूजन में इस्तेमाल की जाने वाली लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां नई होनी चाहिए।

5- पूजा घर और मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ रोली से स्वास्तिक का निर्माण करना भी शुभ माना जाता है।
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