एपी बांध के जवही दयाल मे बांध के समीप पहुची गंडक नदी ।संवाद
- फोटो : Archive
तमकुहीरोड। वाल्मीकिनगर बैराज से नारायणी (गंडक) नदी का डिस्चार्ज फिर तेजी से बढ़ने लगा है। बृहस्पतिवार को 73 हजार क्यूसेक पर पहुंचा डिस्चार्ज शुक्रवार सुबह बढ़कर 1.34 लाख क्यूसेक हो गया। दोपहर तक यह बढ़कर 1.61 लाख क्यूसेक पहुंच गया। डिस्चार्ज में अभी और वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। फिर नदी का दबाव तटबंधों की ओर बढ़ने लगा है।
सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब साढ़े 17 किलोमीटर लंबाई में गंडक नदी बहती है। नदी का डिस्चार्ज बढ़ने के साथ ही तटबंध के संवेदनशील स्थानों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि तटबंधों के डेंजर जोन में परियोजना के तहत बचाव कार्य पूरा हो चुका है। ऐसे में फिलहाल बांध को किसी तरह का खतरा नहीं बताया जा रहा है। बावजूद इसके लगातार बढ़ रहे डिस्चार्ज को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने चौकसी बढ़ा दी है।
जेई ने बताया कि जलस्तर बढ़ने पर नरवाजोत में किमी 1.700 पर स्थित ठोकर, जवही दयाल में कट इन वन से कट इन टू के बीच तथा किमी 3.500 से किमी 4.000 के बीच नदी का दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा विरवट कोन्हवलिया में किमी 7.200, नोनियापट्टी में किमी 12.518 और कचहरी टोला में किमी 14.500 के आसपास भी नदी का दबाव बढ़ने की आशंका है। नदी के बढ़ते डिस्चार्ज को देखते हुए जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील यादव समेत बाढ़ खंड के अन्य अभियंताओं ने तटबंधों पर निगरानी तेज कर दी है। संवेदनशील स्थानों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि पानी का दबाव बढ़ने पर तत्काल बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
-
ग्रामीणों को कटान की चिंता
-क्षेत्र के रामप्रसाद सिंह, बाबूलाल निषाद, दीनानाथ सिंह और बृजकिशोर साहनी आदि का कहना है कि नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच यदि कहीं बैक रोलिंग शुरू हुई तो कटान का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरे तटबंध पर सुरक्षा तंत्र मजबूत रखने और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी की मांग की है।