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गंडक नदी खतरे के निशान से सिर्फ 10 सेंटीमीटर नीचे

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गंडक नदी खतरे के निशान से सिर्फ 10 सेंटीमीटर नीचे
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गंडक नदी के तराई वाले क्षेत्रों में बाढ़ का पानी अभी भी बरकरार
बाढ़ राहत चौकियों और ऊंचे स्थानों पर बाढ़ पीड़ित लिए हैं शरण
प्रशासन ने उपलब्ध कराई नावें, भोजन के किट भी उपलब्ध कराए
पिपराघाट में भी बाढ़ पीड़ितों की सहूलियत के लिए बढ़ाई गईं नावों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। सोमवार को गंडक नदी के डिस्चार्ज में कमी तो आई, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की परेशानी अभी भी बनी हुई है। सोमवार को शाम तक गंडक नदी खतरे के निशान से दो सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई थी, लेकिन मंगलवार को इसने थोड़ी राहत दी। सुबह गंडक नदी में तीन लाख 400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। डिस्चार्ज में कमी की वजह से गंडक नदी खतरे के निशान से दस सेंटीमीटर नीचे आ गई है। इस तरह मंगलवार को गंडक नदी के जलस्तर में सिर्फ 12 सेंटीमीटर की कमी आई। इस वजह से गंडक नदी के पास स्थित क्षेत्रों में बाढ़ से अभी भी लोग प्रभावित हैं। खड्डा क्षेत्र के शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर सहित कई गांवों में बाढ़ का पानी भरा है, जिससे लोगों को बाढ़ राहत शिविर अथवा ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। प्रशासन की तरफ से संचालित सामुदायिक किचन से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। बिजली के अभाव में बाढ़ पीड़ितों को अंधेरे में परेशान होना पड़ रहा है। उधर, तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के पिपराघाट में बाढ़पीड़ितों की सहायता के लिए चार और सरकारी नावें लगाई गई हैं। इस तरह अब तक 12 सरकारी नावें लगाई जा चुकी हैं।
संपर्क मार्गों पर भरा बाढ़ का पानी
खड्डा। पिछले छह दिनों से बाढ़ से जूझ रहे मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर आदि गांवों के लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों के घरों में पानी भरा हुआ है। लोगों को मवेशियों से लेकर अपने जरूरी सामानों की सुरक्षा की चिंता भी सता रही है। सड़कों पर पानी भरा होने के कारण मरचहवा और बसंतपुर गांव तथा इनके टोलों में निवास करने वाले बाढ़ पीड़ित जरूरी सामग्री व अन्य कार्य के लिए नाव पर आश्रित हैं। अगस्त के अंतिम सप्ताह में भी खड्डा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर की पूरी आबादी बाढ़ के पानी से घिरी है। मंगलवार को भी मरचहवा दक्षिण टोला, पूरब टोला, उत्तर टोला व बसंतपुर के ग्रामीण नाव से डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करके सोहगीबरवा गए। बसंतपुर व मरचहवा के विद्यालयों में पानी भरा हुआ है। बसंतपुर निवासी कन्हैया, जवाहिर, फूलमती, चंद्रिका आदि बताते हैं कि अभी भी बाढ़ का पानी गांव के ज्यादातर घरों में भरा है। सड़कों पर पानी होने से कहीं आने जाने के लिए मात्र नाव ही सहारा है। लगातार पानी में रहने से लोगों के पैरों में सड़न पैदा हो गई हैं। पशुओं के लिए चारे की दिक्कत हो रही है। तीन दिन पहले कुछ पानी कम हुआ था, लेकिन पुन: बढ़ जाने से परेशानी अधिक हो गई है। इसी तरह शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर गांव के लोग भी परेशान हैं। प्रशासन की तरफ से चलाए जा रहे सामुदायिक भोजनालय से लोगों को भोजन मिल रहा है। प्रशासन ने नाव उपलब्ध कराया है। एक साल से बिजली नहीं होने व मिट्टी तेल नहीं मिलने से रात में काफी परेशानी हो रही है। सालिकपुर, महदेवा गांव के लोग अभी भी बाढ़ शरणालय में शरण लिए हुए हैं। संवाद
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600 परिवारों में वितरित हुआ राशन किट
सड़क जलमग्न होने के कारण राशन किट पहुंचाने में देरी
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। बाढ़ प्रभावित महदेवा और सालिकपुर गांव में मंगलवार को राहत सामग्री वितरित की गई। इस दिन 600 परिवारों में राहत सामग्री का वितरण किया गया। सालिकपुर के बाढ़ राहत केंद्र पर पहुंचे विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने कहा कि मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, नरायनपुर, हरिहरपुर, सालिकपुर, महदेवा आदि गांवों में बाढ़ प्रभावित करीब तीन हजार परिवार चिह्नित हुए हैं। इनमें से मंगलवार को महदेवा और सालिकपुर के करीब 600 परिवारों को राशन किट दिया गया। मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर गांव के लोगों तक सड़क क्षतिग्रस्त व जलमग्न होने के कारण राशन किट पहुंचाने में विलंब हो रहा है। रास्ता सुलभ होते ही राहत किट वितरित कर दिया जाएगा। बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए हमेशा तत्पर हैं। खड्डा के एसडीएम अरविंद कुमार ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों में वितरण किए जा रहे राशन किट में आटा 10 किलोग्राम, चावल 10 किलोग्राम, दाल दो किलोग्राम, आलू 10 किलोग्राम, रिफाइन एक लीटर, नमक आधा किलोग्राम, हल्दी, मिर्च, धनिया प्रति ढाई सौ ग्राम, भूजा पांच किलोग्राम, गुड़ एक किलोग्राम, भुना चना दो किलोग्राम, मोमबत्ती, माचिस, बिस्कुट दस पैकेट, साबुन दो आदि सामग्री है। सर्वे में जिनका नाम है, उन्हें टोकन के माध्यम से राहत सामग्री दी जा रही है। हर गांव में निशुल्क भोजनालय लगातार संचालित हैं।
इस दौरान तहसीलदार कृष्ण गोपाल त्रिपाठी, पूर्ति निरीक्षक बीएन मिश्रा, कानूनगो रमेशचंद्र गुप्ता, लालजी, रामनवल पटेल, विनोद सहित संबंधित लेखपाल और अमीन आदि मौजूद थे।
जलस्तर में उतार-चढ़ाव से एपी बांध पर दबाव
लोगों से भी नदी से दूर रहने की सलाह दी गई
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी में वाल्मीकिनगर बैराज से लगातार काफी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। इससे एपी बांध पर पानी का दबाव व कटान का खतरा बना हुआ है। तमकुहीराज के सीओ ने मंगलवार को बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ बांध और इसके किनारे बसे लोगों की सुरक्षा के इंतजाम का जायजा लिया। सभी संवेदनशील स्थानों पर सावधानी बरतने की सलाह दी। पिपराघाट के नरवाजोत बांध से लगायत एपी बांध के अहिरौलीदान के बीच बांध के किनारे नरवाजोत, दहारी टोला, तवकल टोला, जंगलीपट्टी, बिनटोली, चैन पट्टी, जवही दयाल, ततवा टोला, बिरवट कोंहवलिया, बाकखास, बाघाचौर, नोनियापट्टी, कचहरी टोला, डीह टोला सहित अन्य कई गांव और उनके टोले बसे हैं। वहां लगभग 15 हजार की आबादी निवास करती है और उनकी सुरक्षा बांध की मजबूती पर निर्भर है। इस समय बांध पर भी गंडक नदी का दबाव बढ़ जाने से खतरा बना है। क्योंकि इस क्षेत्र के लोग व प्रशासन 1984 में पिरोजहा के पास और 2007 में घघवा जगदीश के पास टूटे बांध से हुई बर्बादी का मंजर देख चुके हैं। इस गंडक नदी में कई नौका दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।
मंगलवार को तमकुहीराज के सीओ फूलचंद्र कन्नौजिया ने बाढ़खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी व अन्य अभियंताओं के साथ एपी बांध व बांध के किनारे बसे लोगों की सुरक्षा के इंतजाम का जायजा लिया। उन्होंने अभियंताओं से संभावित खतरे वाले सभी संवेदनशील स्थानों पर सावधानी बरतने व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इस समय नदी में पानी की मात्रा अधिक होने के साथ खतरा भी अधिक बढ़ गया है। ऐसे में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सावधानी बरती जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से भी नदी से दूर रहने और नदी में नावों को ले जाने वालों को चेताया। उन्होंने बाढ़ खंड के अभियंताओं से नदी में नाव ले जाने व ले आने वाले लोगों को चिह्नित किए जाने का निर्देश दिया।
पिपराघाट में लगाई गईं चार और नावें
तमकुहीरोड। पिपराघाट में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए तमकुहीराज तहसील प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित चार और गांवों में आवागमन सुचारू रखने के लिए चार सरकारी नावों को चलाने की अनुमति दी है। इसके पहले आठ नावों को चलाने की अनुमति मिली थी। इस तरह अब बाढ़ प्रभावित पिपराघाट में कुल 12 सरकारी नावों से लोग अपने घरों तक आ जा सकेंगे। वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में लगातार छोड़े जा रहे तीन से चार लाख क्यूसेक पानी से पिपराघाट में बाढ़ के हालात उत्पन्न हो गए हैं। इससे पिपराघाट एहतमाली और पिपराघाट मुस्तकिल ग्राम सभा के इमिलिया टोला, गोलाघाट, चौकी टोला, उपाध्याय टोला, जयपुर, देवनारायन टोला, मोतीराय टोला, शिव टोला, बुटन टोला, हनुमान टोला, नरवा टोला, जोगनी टोला सहित 12 गांव पूरी तरह प्रभावित हैं। इन गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है और सभी संपर्क मार्गों पर कहीं घुटनों तक तो कहीं कमर तक पानी भर गया है। इससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। आवाजाही के अलावा अन्य कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि इन बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों के आवागमन में आ रही असुविधा को देखते हुए व राजस्व निरीक्षक प्रमोद श्रीवास्तव, लेखपाल प्रमोद यादव व विनोद गौतम के रिपोर्ट की आधार पर पहले आठ गांवों में सरकारी नाव चलाए जाने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद अब इमिलिया टोला, गोलाघाट, जयपुर और चौकी टोला को भी इसमें शामिल कर लिया गया है। इन चारो गांवों में भी सरकारी नावें चलाए जाने की अनुमति दी गई है। इस तरह तमकुहीराज तहसील प्रशासन की ओर से पिपराघाट के 12 बाढ़ प्रभावित गांवों में 12 नावों की व्यवस्था कर दी गई है, ताकि लोगों को आने जाने में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। तमकुहीराज के एसडीएम एआर फारुखी का कहना है कि पिपराघाट के बाढ़ प्रभावित गांवों में सरकारी नावों की व्यवस्था कर दी गई है। सभी राजस्वकर्मियों को संबंधित गांवों में चौकन्ना रहने का निर्देश दिया गया है। संवाद
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गंडक नदी में जलस्तर घटा
खड्डा। गंडक नदी के डिस्चार्ज में कमी आने से मंगलवार की शाम तक जलस्तर घट गया। शाम छह बजे तक नदी का डिस्चार्ज 2.64 लाख पर आ गया। इसी तरह जलस्तर भैसहां मीटर गेज पर 95.66 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि यह अभी भी चेतावनी बिंदु से ऊपर है। सोमवार को नदी खतरे के निशान को पार कर गई थी, लेकिन मंगलवार को सुबह से ही वाल्मीकिनगर बैराज से नदी में छोड़े जा रहे पानी के डिस्चार्ज में कमी आने लगी। मंगलवार को सुबह पांच बजे डिस्चार्ज कम होते हुए 307600 क्यूसेक पर आ गया। शाम चार बजे इसमें और कमी आई और 273600 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया। शाम छह बजे घटकर यह 2.64 लाख क्यूसेक पर आ गया। डिस्चार्ज कम होने से जलस्तर में भी कमी आई। मंगलवार सुबह आठ बजे भैसहां गेजस्थल पर जलस्तर खतरे के बिंदु 96 मीटर से दस सेंटीमीटर नीचे 95.90 पर था। शाम छह बजे इसमें और कमी आई और जलस्तर 95.66 मीटर दर्ज किया गया। संवाद
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