कुशीनगर। छितौनी-तमकुही रेल परियोजना के छितौनी पुलिस चौकी के समीप रविवार शाम रिसाव शुरू होने से लोग दहशत में आ गए। अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई। जेसीबी मशीन से बांध बचाव कार्य शुरू कर दिया। बाढ़ का पानी बांध से महज एक इंच नीचे है।
ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 2017 में भी गंडक बराज से करीब 5 लाख 1 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होने के दौरान छितौनी-तमकुही रेल बांध टूट गया था। इसके बाद छितौनी, नरकहवा, बेलवनिया समेत करीब एक दर्जन गांवों में भारी तबाही हुई थी। रविवार को बांध में रिसाव शुरू होने से तटवर्ती इलाकों के लोगों की चिंता बढ़ गई है।
नारायणी नदी के उस पार बसे करीब 35 हजार लोग बाढ़ के संकट से जूझ रहे हैं। नेपाल द्वारा पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। रविवार की रात 10 बजे तक नारायणी में पानी का बहाव 5,19,700 क्यूसेक पहुंच गया था। प्रशासन ने छह लाख क्यूसेक पानी पहुंचने की संभावना जताई है। नदी खतरे का निशान पार कर गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ आबादी की ओर पानी बढ़ रहा है। सालिकपुर चौकी के पास सड़क पर महादेवा गांव के 600 परिवारों ने शरण ली है।
जिलाधिकारी संजय कुमार चौहान, एडीएम पवन कुमार और सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश ने सालिकपुर चौकी के पास बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने तीन नंबर ठोकर और छितौनी बंधे का निरीक्षण भी किया। खड्डा तहसील क्षेत्र के मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, शालिकपुर और महादेवा गांवों में रविवार को घुटने भर पानी भरा रहा। एनडीआरएफ की टीम फंसे लोगों को ऊंचे स्थानों पर पहुंचा रही है। महादेवा गांव के लोगों ने सालिकपुर चौक के पास हाईवे किनारे शरण ली है। सेवरही ब्लॉक के दस गांव भी बाढ़ प्रभावित : बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। चार से अधिक सड़कों पर पानी भर गया है। राहत-बचाव के लिए 200 से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। बाढ़ चौकियों को भी अलर्ट कर दिया गया है।
दोआबा के गांवों में फैल रहा पानी
सेवरही ब्लॉक की पिपराघाट ग्राम सभा बांसी और गंडक नदी के दोआबे में स्थित है। जीरो पुल के रास्ते बांसी नदी में उल्टा बहकर दोआबे में पहुंचता है। गंडक का पानी दोआबा के गांवों के चारों तरफ तेजी से फैल रहा है। तवकल टोला, दहारी टोला, इमिलिया टोला, भंगी टोला, मुसहरी टोला, हनुमान टोला, शिव टोला, जोगनी, गोलाघाट, देवनारायण टोला, उपाध्याय टोला, मोतीराय टोला और जवही दयाल का ततवा टोला जैसे अनेक गांव बुरी तरह घिर गए हैं।
फैजाबाद से मंगाई गई छह और मोटर बोट
नदी उस पार के गांवों में एनडीआरएफ व एसडीआरएफ एक-एक टीम के अलावा एक प्लाटून पीएसी बचाव कार्य में जुटी है। खड्डा एसडीएम, तहसीलदार और राजस्वकर्मियों की टीम कैंप कर रही है। फैजाबाद से छह और मोटर बोट मंगाई गई हैं। कम्यूनिटी किचन संचालित : एडीएम पवन कुमार नेबताया कि गांवों में कम्यूनिटी किचन संचालित किया जा रहा है। बाढ़ पीडि़तों में राशन किट का वितरण भी करा दिया जाएगा। बंधों पर निगरानी के लिए बाढ़ खंड के जेई, चौकीदारों की ड्यूटी लगाई गई है। तमकुहीराज और खड्डा सीओ को थानेदारों और पुलिस कर्मियों के साथ गांवों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
ठोकरों पर दबाव
तमकुहीरोड। सेवरही क्षेत्र में नदी नरवाजोत से अहिरौलीदा तक बांधों से सटकर बह रही है। जलस्तर बढ़ने से बचाव कार्य बंद हो गया है। पिपराघाट, जंगलीपट्टी सहित कई ठोकरों पर तेज धारा से टकरा रही है। इससे बंधों पर पानी का दबाव बढ़ गया है और कई ठोकरें खतरनाक स्थिति में हैं। क्षेत्र के मथुरा सिंह, बाबूलाल निषाद और अन्य ग्रामीणों ने कटान का खतरा बताया। बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह ने खतरे की पुष्टि की। कहा कि बांध और नदी के डिस्चार्ज पर नजर है। अमवाखास बांध पर दबाव : बरवापट्टी। नारायणी नदी की तेज धारा से अमवाखास बंधे पर दबाव बना है। लक्ष्मीपुर के पास किमी 6.8 और किमी 7.2 पर सर्वाधिक दबाव है। जल डिस्चार्ज बढ़ने पर बंधे और ठोकरों को नुकसान हो सकता है, जिससे हजारों ग्रामीण सहमे हैं।