पडरौना। भीषण गर्मी और उमस से राहत पाने की चाहत बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है। दोपहर की तपिश से बचने के लिए नदी और नहरों में नहाने पहुंच रहे बच्चे लगातार हादसों का शिकार हो रहे हैं।
जिले में पिछले 10 दिनों में अलग-अलग क्षेत्रों में डूबने से पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद न तो प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कदम उठाया जा रहा है और न ही अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर पर्याप्त नजर रख रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों के बच्चे और किशोर दोपहर के समय परिजनों को बिना बताए टोलियों में नदी-नहरों की तरफ नहाने निकल जाते हैं। पानी की गहराई का सही अंदाजा न होने के कारण वे गहरे पानी में चले जाते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं।
ज्यादातर मामलों में अभिभावकों को घटना की जानकारी तब मिलती है जब पानी में डूबने से किसी की जान जा चुकी होती है। अचानक से हो रहे पानी में डूबकर मौतों से घरों का चिराग बुझ जा रहे हैं, इसके बावजूद अन्य लोग इससे सबक नहीं ले रहे हैं।
मुख्य पश्चिमी गंडक नहर में पानी आने के बाद इन दिनों स्नान करने वालों की डूबकर मौत होने के आंकड़ों में इजाफा हुआ है। पिछले साल हेतिमपुर के पास देवरिया और कुशीनगर के युवक किशोर स्नान करने पहुंच रहे थे, सोशल मीडिया पर वीडियो व स्टंटबाजी का वीडियो वायरल होने के बाद कसया सीओ के निर्देश पर स्नान करने पर यहां रोक लगाई गई। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के छोटी गंडक नदी में फर्दहा के पास युवक जान जोखिम में डालकर स्नान कर रहे हैं, रील बना रहे हैं। लगातार डूबकर युवकों की मौत होने के बाद हाटा विधायक मोहन वर्मा की पहल पर पुलिस निगरानी बढ़ा दी गई और वहां स्नान नहीं करने के लिए बोर्ड लगा, लेकिन इस साल बोर्ड युवकों ने तोड़ दिया है और पुलिस की निगरानी भी कमजोर पड़ गई है, जिसका नतीजा है कि युवक व किशोर जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।