सुकरौली। क्षेत्र के पट्टन गांव में करीब 100 एकड़ सरकारी जमीन का फर्जीवाड सामने आने के बाद प्रशासन चकबंदी से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल में जुट गया है। राजस्व विभाग की ओर से जमीन की पैमाइश और संबंधित लोगों को नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब चकबंदी अभिलेखों की भूमिका अहम हो गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि जमीन की वास्तविक स्थिति और पुराने अभिलेखों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी।
राजस्व अभिलेखों में तीन अलग अलग गाटा की करीब 100 एकड़ भूमि सरकारी दर्ज बताई जा रही है। इसमें करीब 30 एकड़ जमीन पर बिजलीघर और सरकारी गोदाम हैं। करीब 60 एकड़ जमीन खाली बताई जा रही है। लगभग 10 एकड़ हिस्से में किसानों के मकान, खेती और अन्य उपयोग की बात सामने आई है। इस कार्रवाई के बाद प्रभावित किसानों में बेचैनी बढ़ गई है। किसानों का दावा है कि उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री कराई है और कई परिवारों की तीन पीढ़ियां इसी जमीन पर रह रही हैं। ऐसे में चकबंदी के पुराने अभिलेखों में जमीन की स्थिति क्या दर्ज है, यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।
प्रशासन की ओर से अब चकबंदी विभाग से संबंधित अभिलेख और रिपोर्ट हासिल करने की प्रक्रिया चल रही है। तहसील का राजस्व विभाग भी चकबंदी अभिलेखों के इंतजार में है।
अधिकारियों के अनुसार, अभिलेखों की जांच के बाद ही जमीन का पूर्व में स्वरूप स्पष्ट होगा। तहसीलदार जया सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में तहसील के अलावा चकबंदी विभाग के अभिलेख अहम हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही नियमानुसार आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।