गोरखपुर। युवकों को नौकरी का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी की रकम मंगाने वाले गिरोह का गुलरिहा पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आरोपी रवि निषाद, विनय साहनी, आलोक साहनी, अंकित दुबे खाते खुलवाने के बाद एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक और अन्य बैंक दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेते थे।
इसके बाद अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी से हासिल रकम इन खातों में मंगाकर दूसरे खातों में स्थानांतरित करते और एटीएम से नकदी निकालते थे। बृहस्पतिवार को पूछताछ के बाद चारों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि रामपुर बुजुर्ग निवासी शुभम निषाद ने गुलरिहा थाने में तहरीर दी थी। उसके अनुसार वह काफी समय से रोजगार की तलाश में था। इसी दौरान उसकी मुलाकात जंगल डुमरी नंबर एक निवासी रवि निषाद, रामगढ़ताल क्षेत्र के मिर्जापुर निवासी विनय साहनी और आलोक साहनी से हुई। तीनों ने उसकी मुलाकात गायत्री नगर निवासी अंकित दुबे से कराई। आरोपियों ने अच्छी नौकरी दिलाने और समय-समय पर आर्थिक लाभ देने का भरोसा देकर उसे अपने जाल में फंसा लिया।
आरोप है कि इसके बाद रोजगार और व्यावसायिक कार्य का हवाला देकर शुभम के परिचित निहाल निषाद, विजय शर्मा, राजवीर चौहान और लोकेश के नाम से भटहट स्थित इंडियन बैंक और महाराजगंज के जीतपुर स्थित यूको बैंक शाखा में खाते खुलवाए गए। खाताधारकों से एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक समेत बैंक से संबंधित अन्य दस्तावेज भी ले लिए गए।
कुछ समय बाद खाताधारकों को खातों में हो रहे संदिग्ध लेनदेन की जानकारी हुई। पता चला कि अलग-अलग राज्यों के लोगों से साइबर ठगी के जरिये हासिल रकम इन खातों में जमा की जा रही थी। इसके बाद रकम दूसरे बैंक खातों में भेजने के साथ एटीएम से नकदी भी निकाली जा रही थी। खाताधारकों का कहना है कि उन्हें खातों के वास्तविक इस्तेमाल और उनमें होने वाले लेनदेन की जानकारी नहीं थी।
इसके बाद शुभम ने पुलिस से शिकायत की। तहरीर के आधार पर गुलरिहा पुलिस ने रवि निषाद, विनय साहनी, आलोक साहनी, अंकित दुबे और एक अज्ञात के खिलाफ आईटी एक्ट समेत गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच के दौरान साइबर ठगी की रकम के लेन-देन से जुड़े साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने चारों नामजद आरोपियों को मदरहवा पुल के पास से गिरफ्तार कर लिया।
सीओ गोरखनाथ ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से मिले कागजात के आधार पर बैंक खातों से हुए लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। साइबर ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई और इस नेटवर्क से अन्य कौन लोग जुड़े हैं, इसकी भी जांच की जा रही है।