जिले में स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मचारी हुए दागदार
- एएनएम भर्ती घोटाले के बाद सरकारी धन के गबन के मामले से हड़कंप
- कई अन्य मामलों की जांच शुरू होने की आशंका में कर्मचारी
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में भ्रष्टाचार का दीमक लग गया है। रोजाना नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। संविदा एएनएम की भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद सरकारी धन के गबन का भी मामला खुल गया है। डीएम के पास हुई शिकायत की गोपनीय जांच में नया प्रकरण सामने आने से हड़कंप मचा हुआ है। इस केस में भी मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी चल रही है।
जिले में वर्ष 2016 से लेकर 2018 के बीच 26.25 लाख रुपये के हेरफेर का मामला सामने आया है। इस प्रकरण की शिकायत होने पर जिलाधिकारी ने जांच कराई। पता चला कि तत्कालीन सीएमओ, 14 एमओआईसी और पटल प्रभारी इस गड़बड़ी में शामिल रहे हैं। डीएम ने शासन को जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही सीएमओ को मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है। इस बार जो गड़बड़ी सामने आई है। वह जननी सुरक्षा कार्यक्रम से जुड़ा हुआ मामला है। जांच के दौरान सामने आया है कि प्रसूताओं के भोजन के लिए मिलने वाली रकम जिले के 14 एमओआईसी ने अपने निजी बैंक खातों में जमा करा लिया। इसमें सीएमओ ऑफिस के कुछ लिपिक भी शामिल हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर ही सामान की खरीदारी करके लाभार्थियों को उपलब्ध कराया जाना था। भुगतान के लिए पैसा स्थानीय विक्रेता के बैंक एकाउंट में करना था।
संविदा एएनएम प्रकरण की शुरू हुई जांच
जिले में संविदा एएनएम की भर्ती मामले में भी धांधली हुई है। यह प्रकरण सामने के बाद डीएम ने जांच कराई तो एसीएमओ और दो अन्य कर्मचारियों की भूमिका पाई गई। डीएम के आदेश पर तीनों के खिलाफ पडरौना कोतवाली में भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोप है कि संविदा भर्ती के मानक का पालन नहीं किया गया। मनमानी तरीके से एएनएम की तैनाती कर दी गई। मुकदमा दर्ज करने के बाद कोतवाली पुलिस ने एएनएम भर्ती की जांच शुरू कर दी है। सभी पक्षों का बयान और अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामलों की शिकायत आने पर जांच कराई जा रही है। ऐसे प्रकरण जिनमें गड़बड़ी मिली है। उनमें शामिल स्वास्थ्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सभी मामलों में मुकदमा दर्ज कराकर रिकवरी के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।
- एस राजलिंगम, जिलाधिकारी, कुशीनगर