धनहा में मृतक योगेश के घर पहुंचे राजस्व कर्मी एवं मौजूद भीड़
सुकरौली। घर के आंगन में पसरा सन्नाटा, नम आंखों से अपनों को निहारते मासूम बच्चे और हर चेहरे पर दर्द की गहरी लकीरें। धनहा निवासी योगेश की मौत ने सिर्फ एक परिवार का सहारा नहीं छीना, बल्कि पांच बच्चों के भविष्य को भी अनिश्चितताओं के भंवर में धकेल दिया है।
चार वर्ष पहले इन बच्चों की मां का निधन हो गया था। उस समय सबसे बड़ा सहारा बने पिता योगेश ने मां और पिता दोनों की जिम्मेदारियां निभाईं। बच्चों को दुलार देना हो, उनकी जरूरतें पूरी करनी हों या भविष्य के सपने संजोने हों, योगेश ही उनकी पूरी दुनिया थे। लेकिन अब वह दुनिया भी उजड़ गई है।
बुधवार को झाड़ियों में मिला योगेश का शव पूरे इलाके को स्तब्ध कर गया। घटना स्थल पर पहुंचीं बच्चियों की सूनी आंखें और मासूम चेहरों पर पसरी बेबसी हर किसी का दिल पिघला रही थी। उन्हें शायद अभी यह पूरी तरह समझ भी नहीं है कि जिस पिता की उंगली पकड़कर वे जीवन की राह पर चल रहे थे, वह अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।
ग्रामीणों की जुबान पर एक ही सवाल है कि इन बच्चों का भविष्य अब किसके भरोसे होगा। पहले मां का साया सिर से उठा और अब पिता भी हमेशा के लिए बिछड़ गए। एक के बाद एक मिले इन घावों ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया है। योगेश की मौत की जांच भले पुलिस कर रही हो, लेकिन इन मासूम बच्चों की आंखों में उमड़ता दर्द हर किसी के मन में एक टीस छोड़ रहा है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं।