सुकरौली। मौसम के बदल रहे मिजाज और आगलगी की घटनाओं के बीच किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। खेतों से गेहूं की फसल काटकर किसान उसे घरों में सुरक्षित रख तो चुके हैं, लेकिन अब तक सरकारी खरीद शुरू न होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रशासन की उदासीनता से किसानों में बेचैनी साफ झलक रही है।
क्षेत्र के पैकौली गांव के किसान अजय प्रकाश बताते हैं कि इस बार मौसम ने पहले ही काफी नुकसान पहुंचाया है। कभी तेज धूप तो कभी अचानक हवा और हल्की बारिश ने फसल को प्रभावित किया। किसी तरह फसल को काटकर घर लाए हैं, लेकिन अब खरीद न होने से डर बना हुआ है। फसल काटकर रखे हैं लेकिन खरीद शुरू नहीं होने से चिंता बनी हुई है।
परसिया गांव के किसान विश्वजीत का कहना है कि गांव में कई जगह आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। इससे सभी किसान भयभीत हैं। घर में रखी गेहूं की ढेरियां अब हमें डराने लगी हैं। अगर जल्द खरीद शुरू नहीं हुई तो बड़ा नुकसान होने का खतरा है। सरकार हर साल समर्थन मूल्य पर खरीद का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है।
पिपरा लालमन गांव के किसान राकेश कुमार ने बताया कि खरीद केंद्र अभी तक पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सके हैं। कागजों में तैयारी पूरी दिख रही है, लेकिन धरातल पर कोई व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। पिछले वर्ष थक-हारकर दुकानदार को गेहूं बेचना पड़ा था। इस साल भी लग रहा है वही करना पड़ेगा।
पड़री के गुड्डन मिश्रा कहना है कि अगर जल्द ही खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो उन्हें मजबूरी में औने-पौने दाम पर गेहूं बेचना पड़ेगा। इससे आर्थिक नुकसान होगा। साथ ही आगलगी और मौसम की अनिश्चितता से फसल की सुरक्षा बड़ी चुनौती है।
इस संबंध में तहसीलदार जया राय का कहना है कि संबंधित अधिकारियों से हमारी बात हुई है। हालांकि, अभी तक खरीद कहां शुरू हुई है? यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। दोबारा बात करके खरीद शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जएंगे।