आधी रात को आग लगने के बाद नौमी पत्नी और बच्चों को बचाने की कोशिश कर रहा था और शोर मचा रहा था। लेकिन झाेपड़ी आबादी से दूर होने के कारण लाेगों तक आवाज नहीं पहुंच पा रही थी। झोपड़ी में रखा पेट्रोमैक्स सिलिंडर फटा तो मोहल्ले वालों की नींद खुली और आग की लपटें देखकर दौड़ पड़े लेकिन काफी देर हो चुकी थी और छह जिंदगियां राख हो गई थीं।
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आग लगने की घटना के दो घंटे बाद फायर ब्रिगेड का वाहन पहुंचा। नौमी की झोपड़ी से निकली आग की चिंगारी से भाई और पिता की झोपड़ी भी जल गई थी। भाई की झोपड़ी में सिर्फ सामान था, जबकि नौमी के पिता सरयू बाहर सो रहे थे। पास में सागौन का बगीचा भी आग की चपेट में आ गया। इसलिए गांव वालों को यह लगा कि बगीचे में आग लगी है। जबब झोपड़ी में रखा सिलिंडर फटा तो तेज आवाज सुनकर गांव वालों की नींद खुली।
गांव वालों की मानें तो पत्नी और बच्चों की मौत के बाद नौमी बदहवास हो गया। उसे लोग संभालने में जुट गए। झोपड़ी में रखा सामान और चार बाइकें भी जलकर राख हो गईं। समय रहते अगर गांव वाले पहुंच गए हाेते तो शायद पत्नी और बच्चों की जान बच गई होती।