दुदही। कस्बे के सुराजी बाजार स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठे दिन कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने श्रीराम वनवास का प्रसंग सुनाया तो श्रद्धालुओं की आंखें भर आईं।
कथावाचक ने कहा कि अयोध्या के कोप भवन में कैकेयी ने राज दशरथ से दो वचन मांगे। राजा दशरथ ने कहा कि रघुकुल रीति सदा चल आई। प्राण जाई पर वचन न जाई.. यह सुनते ही कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने दो वचनों में से पहला वचन अपने पुत्र के लिए अयोध्या की राजगद्दी मांग ली व दूसरा वचन श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। कैकेय की यह कटु वचन सुनते ही राजा दशरथ के होश उड़ गए। वहीं जब भगवान राम को इस बात का पता चला तो वह खुशी-खुशी वन जाने को तैयार हो गए। भगवान श्रीराम के वन जाने की बात सुनते ही माता सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने के लिए तैयार हो गए। राम जी के मना करने के बाद भी लक्ष्मण नहीं माने। उसके बाद तीनों अयोध्या से वन के लिए निकल पड़े। मार्मिक कथा सुनकर पंडाल में बैठे श्रोताओं के आंखों से आंसू निकलने लगे। कथा के दौरान गिरिजेश जायसवाल, विंध्याचल मित्तल, रामकुमार जायसवाल, विश्वबंधु जायसवाल, राजन ब्याहुत, हरिकेश रौनियार, कीर्तन बिहारी, आलोक, मुकेश, सुनील गुप्ता, स्नेहलता जायसवाल आदि शामिल रहे।