हाटा। शहीद अमन सिंह के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन मंगलवार को भी हाटा के अब्दुल हमीद नगर स्थित उनके पैतृक आवास पर लोगों का तांता लगा रहा। सुबह से देर शाम तक जनप्रतिनिधि, परिचित, ग्रामीण और रिश्तेदार शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचते रहे। घर का माहौल अब भी गमगीन है। हर कोना मानो अपने वीर जवान की याद में सिसक रहा है।
शहीद के पिता यशवंत सिंह दरवाजे पर आने वाले लोगों से मिलते रहे। लोग उन्हें ढांढ़स बंधाते, हिम्मत रखने की बात कहते, लेकिन उनकी आंखों में इकलौते बेटे को खोने का असहनीय दर्द साफ झलकता रहा। चेहरे पर गहरी उदासी और आंखों में ठहरी नमी बता रही थी कि शब्द चाहे जितने हों, एक पिता के हृदय का खालीपन कोई नहीं भर सकता।
मां विभा देवी की हालत और भी दयनीय है। वह अब भी बेसुध सी हैं। कभी बेटे की तस्वीर को निहारतीं, तो कभी अचानक बिलख उठतीं। आसपास की महिलाएं उन्हें संभालने का प्रयास करतीं, पर मां का दर्द बार-बार आंसुओं में बह निकलता। घर के भीतर सन्नाटा और सिसकियों की आवाजें माहौल को और अधिक मार्मिक बना रही थीं।
दादी बेइला देवी का हाल देखकर हर कोई भावुक हो उठता। वह बार-बार “साहब, साहब” कहकर अमन को पुकारतीं और फिर बेहोश हो जातीं। परिवार के सदस्य और पड़ोसी उन्हें संभालते नजर आए। गांव की महिलाएं दादी और मां को ढांढस बंधाने में जुटी रहीं। कोई पानी पिला रहा था, तो कोई सहारा देकर बैठा रहा था।
घर के बाहर भी शोकाकुल लोगों की भीड़ लगी रही। हर आने वाला व्यक्ति यही कहता कि अमन ने पूरे जिले का नाम रोशन किया है, लेकिन यह बलिदान परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। लोग कुछ देर रुककर श्रद्धांजलि देते और परिजनों को सांत्वना देकर लौटते, मगर घर का माहौल फिर उसी खामोशी में डूब जाता।
शहादत पर पूरे क्षेत्र को गर्व है, लेकिन एक मां, पिता और दादी के लिए यह पीड़ा शब्दों से परे है। अमन की यादें हर किसी की आंखों को नम कर रही हैं और घर की दीवारें आज भी उसके कदमों की आहट तलाश रही हैं।
शहिद अमन सिंह के दरवाजे पर बैठे लोग और मोबाइल में अमन की फोटो देखे पिता यशवंत सिंह